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लाठी-डंडों से पीटकर कॉलेज मैनेजर की हत्या

Wed, 09 May 2018 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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murder shimla
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नवाबगंज के बेरांवा गांव में मामूली बात पर हुए झगड़े में कॉलेज मैनेजर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इससे नाराज लोगों ने शव गंाव में रही रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस अफसरों ने 24 घंटे के भीतर हत्यारोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया तब लोग माने। मामले में परिजनों की तहरीर पर सेना के जवान समेत पांच लोगों को नामजद करते हुए 30-35 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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बेरांव गांव निवासी अब्दुल रफीक खां(70) आलू कारोबारी थे। साथ ही वह गांव में स्थित शेरवानी इंटरमीडिएट कॉलेज के मैनेजर भी थे। मंगलवार को दोपहर में उनका भतीजा जीशान अहमद पुत्र नसीम गांव से कुछ दूरी पर बेरांवा चौराहे पर एक दुकान में पंखा बनवाने गया था। उसने बगल की परचून की दुकान के सामने स्थित पेड़ के नीचे बाइक खड़ी की तो दुकान मालिक गुरुजी निवासी भरही का पूरा ने ऐतराज जताया। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। आरोप है कि वहां भरई का पुरा निवासी सेना का जवान वीरेंद्र पटेल भी मौजूद था। गुरुजी से विवाद होते देख उसने जीशान को पीट दिया। तब तक गुरुजी अपने गांव गया और वहां से लाठी-डंडों से लैश करीब आधा दर्जन लोगों के साथ लौटा। आरोप है कि सभी ने जीशान को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। जीशान खुद को बचाने के लिए चौराहे पर ही स्थित रफीक की आढ़त में भागा और भीतर से शटर बंद कर लिया।

इसके बाद जीशान ने घटना की सूचना करीब दो बजे ताऊ रफीक को दी तो वह बाइक से वहां पहुंच गए और जीशान से बात करने लगे। आरोप है कि इसी दौरान हमलावर लौटे और रफीक को पीटकर मरणासन्न कर दिया। जीशान की सूचना पर पहुंचे परिजन रफीक को करीब चार बजे कौड़िहार स्थित निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसपी गंगापार सुनील कुमार सिंह ने बताया कि जीशान की तहरीर पर पांच लोगों को नामजद करते हुए 30-35 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। नामजद आरोपियों में सेना के जवान वीरेंद्र पटेल के अलावा नागेंद्र, रामआधार, गुुरुजी सभी निवासी भरई का पूरा और करन पटेल उर्फ टोपा निवासी बाबा का पूरा शामिल हैं। आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। चूंकि मामला दो समुदायों का है इसलिए एहतियातन गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है।
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हत्या की खबर मिली तो पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस अस्पताल पहुंची लेकिन लोगों का आक्रोश देखकर शव कब्जे में लेेने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। उधर, आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव लेकर वापस गांव पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि हत्यारोपियों की गिरफ्तारी तक शव नहीं उठाने दिया जाएगा। सूचना मिली तो एसपी गंगापार सुनील कुमार सिंह पहुंचे और लोगों को समझाया। लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। करीब चार घंटे की मान-मनौव्वल के बाद अफसरों ने आश्वासन दिया कि 24 घंटे के भीतर हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद लोग शांत हुए और तब जाकर रात करीब आठ बजे पंचनामा भरा जा सका। इसके बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कॉलेज मैनेजर की हत्या में जिस सेना के जवान वीरेंद्र पटेल पर आरोप लगा है, वह इन दिनों छुट्टी पर घर आया है। हालांकि यह नहीं पता चल सका कि वह कहां तैनात है। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद से ही आरोपी जवान भागा हुआ है। उसके घर पर ताला लटका हुआ है और परिवार के लोग भी लापता हैं। अन्य आरोपी भी गांव से भाग निकले हैं। उनकी तलाश की जा रही है।

उधर रफीक की मौत पर उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बेटे जिलानी और वकार अभी पढ़ाई कर रहे हैं। तीन बेटियों में शबनम व शब्बो की शादी हो चुकी है जबकि तीसरी बेटी शाहीन के हाथ पीले होने अभी बाकी हैं। पिता की मौत पर सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के लोग और रिश्तेदार उन्हें ढ़ांढस बंधाते रहे।
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