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तीन घंटे तक जलता रहा तेलियरगंज

Tue, 22 Nov 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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तेलियरगंज में हुए भारी उपद्रव के पीछे सरासर पुलिस की लापरवाही रही है। पुलिस से ही नाराज होकर लोगों ने तीन घंटे से ज्यादा वक्त तक अराजकता मचाए रखी। तेलियरगंज चुंगी से लेकर बाजार तक लगभग एक किलोमीटर तक भीड़ आगजनी, तोड़फोड़, पथराव करती रही लेकिन पुलिस का अता-पता नहीं था। पुलिस सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आगमन पर वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रही और तेलियरगंज जलता रहा। मामूली हंगामा समझकर शुरू में तीन थाने की पुलिस के साथ अफसर पहुंचे तो उन्हें जान बचाने के लिए फायरिंग करते हुए पीछे हटना पड़ा। आक्रोशित लोग लापरवाही और वाहनों से अवैध वसूली का आरोप लगाते शिवकुटी थानाध्यक्ष को निलंबित करने की मांग करते रहे। भारी बवाल और आगजनी से स्थानीय कारोबारी इस कदर सहम गए थे कि वे दुकानों से माल हटाने लग गए। सड़क पर तमाम लोग गुमटियां और ठेले लेकर भागते नजर आए।
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अवैध रूप से चलने वाली बस ने प्रतापगढ़ जाते समय तकरीबन साढ़े पांच बजे तेलियरगंज में टीबी अस्पताल के पास बाइक और साइकिल को चपेट में लेने के बाद बहन के साथ खड़ी मोनिका राणा को कुचला। लोगों का आरोप है कि कुछ ही फासले पर एक दरोगा और सिपाही मौजूद थे। वे वाहनों से अवैध रूप से धन उगाही कर रहे थे। दुर्घटना होने पर वे भाग खड़े हुए। लोगों का कहना है कि कई बार 100 नंबर के अलावा थानेदार समेत दूसरे पुलिस अफसरों को फोन किया गया लेकिन कहीं से रिस्पांस नहीं मिला।

आखिर में आक्रोशित भीड़ ने चक्काजाम कर पथराव और आगजनी शुरू कर दी। भीड़ ने एक के बाद एक निजी समेत छह बसों, एक डीजल टैंकर, चार बाइक और कई गुमटियों को आग के हवाले कर दिया तब जाकर तीन थानों की फोर्स के साथ सीओ कर्नलगंज डीपी तिवारी और एसपी सिटी विपिन टांडा वहां पुहंचे मगर तब तक स्थिति बेकाबू हो चुकी थी। आलम यह रहा कि पुलिस वहां तक भी नहीं पहुंच सकी जहां छात्रा के शव के पास लोगों ने चक्काजाम कर रखा था। वीआईपी ड्यूटी की वजह से तीन घंटे तक पुलिस के गायब रहने का खामियाजा राहगीरों को भी भुगतना पड़ा। दर्जनों कारों, जीप, टेंपो, बाइक में भी आक्रोशित भीड़ ने तोड़फोड़ की। पूरी तरह अराजकता का माहौल था। बेलगाम भीड़ और छात्रों को किसी का भय नहीं था। वे पुलिस को भी ललकारते हुए ईंट-पत्थर चला रहे थे। भारी पुलिस बल, पीएसी, आरएएफ संग पहुंचे अफसरों से लोगों ने खुलकर कहा कि वसूली कर रहे पुलिसवाले भाग गए और तीन घंटे तक नजर नहीं आए।
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डग्गामार निजी बस ने तेलियरगंज टीबी अस्पताल के सामने पहले साइकिल सवार एजी आफिस के आडिटर तथा बाइक सवार दो लोगों को चपेट में लिया, उन्हें घसीटते हुए बस ने छात्रा को भी रौंद दिया। घटना के वक्त पास में पान की दुकान पर मौजूद रहे सुरेश यादव ने बताया कि बस ने पहले साइकिल सवार मनोज कुमार तिवारी को चपेट में लिया। फिर बाइक को भी जद में लिया। बाइक और साइकिल सवार तीन लोग बेकाबू बस में फंसकर दूर तक घिसट गए। इसी बीच बस ने सड़क किनारे खड़ी छात्रा मोनिका को भी रौंद दिया। लोगों ने घेरा तो ड्राइवर ने बस रोकी और कूदकर भाग गया। साइकिल पर जा रहे मनोज कुमार तिवारी एजी आफिस में आडिटर हैं।

वह मूल रूप से बहरिया में सिकदंरा कस्बे के रहने वाले हैं। शहर में वह शिवकुटी मुहल्ले में रहते हैं। रोज साइकिल पर ही कार्यालय और घर आते-जाते हैं। सोमवार शाम करीब साढे़ पांच बजे वह कार्यालय से लौट रहे थे तभी बस ने उन्हें चपेट में लिया। उसी वक्त पीछे से उनके भाई अनिल तिवारी बाइक पर आए। वह भी एजी कार्यालय में तैनात हैं। उन्होंने भाई को बस के अगले हिस्से में फंसे देखा तो बाइक रोककर उन्हें निकालने में जुट गए। पूर्व पार्षद कमलेश तिवारी भी स्थानीय लोगों के साथ मनोज और बाइक सवार दोनों लोगों को बस के नीचे से निकालने लगे। बड़ी मशक्कत के बाद मनोज समेत तीनों लोगों को निकाल अस्पताल भेजा गया। 

अपनी आंखों के सामने छोटी बहन मोनिका राणा की बस से कुचलकर मौत होती देख 21 वर्षीय मिथिलेश बदहवास हो गई। मोनिका का सिर बस से कुचल गया था। घटना के बाद मिथिलेश शव के पास रोते-चीखते खड़ी थी। पता चला तो टीबी कॉलोनी से मोनिका की दीदी अर्चना और जीजा अमित समेत तमाम लोग आए। मोनिका के शव पर चादर डाला गया। छोटी बहन की मौत ने मिथिलेश और अर्चना को गहरा सदमा पहुंचा। वे रोती-कलपती रहीं।

कॉलोनी की महिलाएं उन दोनों को संभालने की कोशिश करती रहीं। साढ़े पांच बजे हुए हादसे के बाद लगभग चार घंटे तक शव सड़क पर पड़ा रहा। गुस्साए लोग बवाल करते रहे और पुलिस उन्हें काबू में करने की कोशिश करती रही। अपनी आंखों के सामने छोटी बहन को बस से कुचलते देख बीए अंतिम वर्ष की छात्रा मिथिलेश बेहद विचलित हो गई थी। वह शव के पास बैठी लगातार रोती रही। पुलिस अफसरों और स्थानीय लोगों के बीच झड़प के दौरान भी वह कभी शव की ओर देख आंसू बहाती तो तभी गुस्साए लोगों की ओर देखकर गुमसुम हो जाती। तीनों बहन मूल रूप से लखीमपुर खीरी निवासी भजनलाल की बेटियां हैं। सबसे बड़ी अर्चना की नौकरी लगने पर वे तीनों 2008 में यहां आ गई थीं। 

दुर्घटना के करीब साढ़े तीन घंटे बाद डीआईजी विजय यादव, डीएम संजय कुमार, एसएसपी शलभ माथुर टीबी अस्पताल गेट के सामने मोनिका के शव के पास मौजूद लोगों से बात करने पहुंचे तो उन्हें तीखी नाराजगी और झड़प का सामना करना पड़ा। एक महिला वकील ने समेत वहां मौजूद दर्जनों लोगों ने अफसरों के सामने पुलिस को जमकर कोसा। लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिसवाले उसी जगह पर दिन-रात टेंपो, ट्रैक्टरों, अवैध रूप से चलने वाली बसों, ट्रकों से धन उगाही करते हैं।

अवैध बसों को बंद करने की बजाय पैसे लेकर चलने की छूट दी जाती है। इसी अवैध बस ने छात्रा की जान ली और तीन लोग गंभीर घायल हुए। आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि बार-बार फोन करने के बावजूद न तो 100 नंबर से रेस्पांस मिला और न तो शिवकुटी एसओ और दूसरे अफसरों ने फोन पर बात की। एक ने फोन उठाया तो कहा वीआईपी ड्यूटी में हूं। मौत से दुखी लोगों ने थानेदार को निलंबित कर बाकी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को मुआवजा, सड़क पर डिवाइडर बनाने की मांग की। डीएम ने भरोसा दिया कि डिवाइडर जल्द ही बन जाएगा और दोषी पुलिसवालों पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। तब भी लोग अफसरों से तीखी झड़प करते रहे तो आखिर में पुलिस ने भी सख्त रवैया अपनाया। लोगों को फटकार कर और लाठी पटक भगाने के बाद शव को उठाया।
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