खुल्दाबाद थाने में शनिवार रात सीओ प्रथम रूपेश कुमार सिंह और सिपाही वासुदेव यादव के बीच दंगल हो गया। एक अपराधी के बारे में बातचीत के दौरान सीओ और सिपाही के बीच उग्र झड़प होने लगी। नौबत हाथापाई और कॉलर पकड़ने तक आ गई। आरोप है कि सीओ ने सिपाही को हवालात में बंद करने का आदेश दिया। सिपाही की वर्दी भी फट गई। थाने में मजमा लग गया। एसएसपी ने इस घटना की जांच सीओ थर्ड को सौंप सिपाही को निलंबित कर दिया है।
शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे सीओ रूपेश सिंह ने चौकी प्रभारी लूकरगंज आरके चौरसिया, चौकी प्रभारी खुल्दाबाद रवींद्र यादव तथा सिपाही वासुदेव यादव को खुल्दाबाद थाने में बुलाया। ये सभी इंस्पेक्टर तुषार त्यागी के साथ अटाला में वाहन चेकिंग कर रहे थे। वे थाने पहुंचे तो सीओ ने चुनाव आयोग के आदेश पर चल रहे अपराधियों के खिलाफ अभियान के बारे में बात की। सीओ ने चकिया के महेंद्र सिंह के बारे में पूछा तो सिपाही ने कहा कि उसके घर से बताया गया है कि वह पूना में है। सीओ ने महेंद्र का मोबाइल नंबर मांगा तो सिपाही ने कहा कि उसकी बूढ़ी मां नहीं बता सकी। इसी बात पर सीओ और सिपाही के बीच कहासुनी बढ़ती गई।
उन दोनों के बीच तेज आवाज में झड़प के चलते पुलिसवालों के साथ ही कॉलोनी में रहने वाले उनके परिवार के लोग भी जुट गए। आरोप है कि सीओ के हमराही पुलिसकर्मियों ने सिपाही वासुदेव को पकड़कर हवालात में डालने की कोशिश की। खींचतान में सिपाही की वर्दी भी फट गए। बटन टूट गए। वह अपने कमरे की तरफ भागा। इसी बीच खुल्दाबाद इंस्पेक्टर तुषार त्यागी भी आ गए।
उन्होंने एसपी सिटी और एसएसपी समेत दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। सीओ और इंस्पेक्टर ने इस घटना की बाबत जीडी में तस्करा डाला है। सीओ ने लिखा है कि सिपाही नशे में था और उसने अपशब्द कहते हुए मारपीट की और थाने से भाग गया। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि सीओ थर्ड (आईपीएस) विनीत जायसवाल को जांच दी है। सिपाही को निलंबित कर दिया गया।
सिपाही वासुदेव यादव का आरोप है कि सीओ ने गालियां देते हुए कॉलर पकड़कर पीटा और वर्दी खींचकर फाड़ दी। उसे हवालात में बंद करने का आदेश दिया तो उनके हमराही गनर और सिपाहियों ने पकड़ने के लिए मुझे दौड़ाया। गालीगलौज सुनकर थाने की बैरक और कॉलोनी से तमाम पुलिसवाले और उनके परिजन आ गए थे। वह किसी तरह भागकर अपने कमरे में गया वरना सीओ उसे अपने हमराहियों से पिटवाते। उसकी पत्नी ने आईजी और डीआईजी को फोन से इस बारे में बताया। सीओ थाने की जीडी भी शनिवार रात उठा ले गए। उसमें इंस्पेक्टर से उसके खिलाफ तस्करा डलवाया। करीब 20 घंटे बाद सीओ ने जीडी वापस थाने भेजी है।
-सीओ रूपेश सिंह ने अमर उजाला से कहा कि अपराधियों की समीक्षा के दौरान सिपाही ने सही जवाब देने की बजाय अपशब्द बोले। उसने अनुशासनहीनता की। इस बारे में और मैं कुछ नहीं कह सकता क्योंकि मैं खुद मामले में पार्टी हूं। सिपाही का ये आरोप गलत है कि मैंने उसे अपशब्द कहे या फिर मारपीट की।
पुलिस विभाग में सिपाही की नौकरी छोड़कर पुलिसकर्मियों के साथ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले रक्षक कल्याण ट्रस्ट (अराजपत्रित पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन) के संस्थापक अध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह यादव ने अमर उजाला से कहा कि इस मामले में सीओ को सस्पेंड किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने सिपाही के साथ मारपीट की और गालियां दीं। अगर सिपाही वासुदेव के साथ न्याय नहीं होता है तो बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।