इस हादसे में गनीमत यह रही कि शिवा कोल्ड स्टोर से आबादी करीब दो सौ मीटर दूर है इसलिए आम लोगों पर गैस रिसाव से खास प्रभाव नहीं पड़ा। मगर कोल्ड स्टोर से जान बचाकर भागे सौ से ज्यादा मजदूरों की चीख-पुकार से लोग घबराकर लोग घरों से निकले तो गैस की बदबू से वे भी घबरा गए। फिर आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो दहशत में लोग घर से काफी दूर तक भागे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले तो इलाके को खाली कराने की सोच ली थी लेकिन जब गैस का असर कम हो गया तो यह फैसला टाल दिया गया। हालांकि लोग करीब घंटे भर तक अपने घर से दूर खडे़ रहे।
स्टोर से कुछ दूर पर ही झूंसी-सहसों मार्ग स्थित मार्केट में भी गैस का ऐसा असर हुआ कि ज्यादातर व्यापारी दुकानों को बंद किए बिना ही दूर भाग खडे़ हुए। जिनकी दुकानों में कांच के दरवाजे थे उन्होंने दरवाजे बंद कर लिए मगर कुछ ही मिनट बाद गैस के प्रभाव की वजह से उन्हें भी बाहर निकल दूर जाना पड़ा। आलम यह हुआ कि सड़क पर सन्नाटा पसर गया। डर ऐसा हावी हुआ कि व्यापारियों ने पांच बजे के बाद दुकानें खोलीं जब गैस का असर बाजार से खत्म हो गया। कोल्ड स्टोर कर्मियों ने बताया कि रिसीवर पाइप में कम गैस थी इसलिए इलाके में ज्यादा असर नहीं हुआ वरना भारी तबाही मच सकती थी।
कोल्ड स्टोर में अमोनिया गैस रिसाव की चपेट में आकर बेहोश हुए ज्यादातर मजदूर बिहार और पश्चिम बंगाल के हैं। उनमें बिहार के अड़रिया का सुशील कुमार (20),सुशील शर्मा (18), मुकेश (19), सुरेंद्र सिंह (55), आकाश (18), सुरेंद्र कुमार (20). पश्चिम बंगाल का सुशांत कुमार (22), लवकुश (23), राजेश (22), सुवल (40), हनुमानगंज कस्बे के पास धरौली गांव का शैलेंद्र (50) शमिल है। कसेरूआ कला गांव निवासी रामबरन 25 वर्षीय आइस्क्रीम बेचता है। वह कोल्ड स्टोर में यही पता करने गया था कि आइस्क्रीम बनी कि नहीं तभी अमोनिया गैस रिसने लगी और वह भी उसकी जद में आकर बेसुध हो गया। मजदूरों का दम घुटने लगा तथा आंखों में जलन होने लगी। उन सभी को सहसों में एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार से उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
अमोनिया प्लांट की मरम्मत करते वक्त हुए हादसे का शिकार ऑपरेटर दिनेश कुमार के घर में यह खबर पहुंची तो हाहाकार मच गया। रामसूरत मिश्र के चार बेटों में बड़े दिनेश पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। उसके पिता कई लोगों के साथ फौरन मौके पर पहुंच गए। मां हौसला देवी तथा पत्नी साधना भी दो बेटों नैतिक और प्रियांक के साथ घर में रोने-कलपने लगी। गांव की महिलाएं उसे संभालने में जुट गईं। पिता ने पहले आरोप लगाया कि गैस रिसाव होने पर उनके बेटे को जबरन अंदर भेजा गया इसलिए उसकी जान गई। वह रिपोर्ट लिखाएंगे लेकिन देर रात तक पिता की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं मिली।
सहसों की घटना से 15 रोज पहले तेलियरगंज में फर्रूखाबाद कोल्ड स्टोरेज में अमोनिया गैस की रिसाव से हाहाकार मच गया था। एमएनएनआईटी गेट के पास स्थित कोल्ड स्टोर में शाम करीब सवा चार बजे हुए रिसाव से इलाके में लोगों को सांस लेने की दिक्कत हुई और आंख में जलन होने लगी थी। लोगों ने विरोध में चक्काजाम किया था क्योंकि कोल्ड स्टोर आबादी के बीच है और पहले भी वहां गैस रिसाव हो चुका था। जांच में यह भी पता चला कि कोल्ड स्टोर बिना लाइसेंस के चल रहा था। आसपास के लोग कई रोज तक दहशत में रहे और स्थानीय दो स्कूल तीन रोज तक बंद रहे।