इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में छेड़खानी का एक और मामला सामने आया है। छात्राओं से लिखित शिकायत मिलने के बाद इविवि प्रशासन ने आरोपी छात्र को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया है। साथ ही नामांकन निरस्त करते हुए आरोपी छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर दी गई है। हालांकि छात्र को सुनवाई का मौका दिया गया है और उसे अपने पिता संरक्षक के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।
विश्वविद्यालय में स्नातक की एक छात्रा ने चीफ प्रॉक्टर के समक्ष छेड़खानी की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। छात्रा का आरोप है कि एमए प्रथम वर्ष (हिंदी) का छात्र सुधाकर यादव अपने कुछ साथियों के साथ बाइक से उनका पीछा करता है। बृहस्पतिवार को उनसे सभी हदें पार कर दीं। छात्रा अपनी सहेलियों के साथ एफसीआई भवन में स्नातक की कक्षा में शामिल होने जा रही थी। रास्ते में छात्र और उसके कुछ साथियों ने उसे रोकने की कोशिश की और अश्लील कमेंट किए। इसके बाद छात्रा एलएलटी तृतीय में संचालित कक्षा में पहुंची तो सुधाकर वहां भी पहुंच गया और कक्षा का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। कक्षा में मौजूद छात्र-छात्राएं और अध्यापक किसी तरह कमरे से बाहर निकले।
वहां से लौटने के बाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के पास आरोपी छात्र ने छात्रा का हाथ पकड़ने की कोशिश की और जब छात्रा की सहेलियों ने उसे टोका तो उन्हें जूते-चप्पल से पीटने की धमकी दी गई। घटना के बाद छात्रा अपने सहेलियों के साथ सीधे चीफ प्रॉक्टर कार्यालय पहुंची और पूरी घटना बताई। पीछे से आरोपी छात्र भी पहुंच गया। सहेलियों ने भी चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे को छात्र की करतूत के बारे में बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ प्रॉक्टर ने आरोपी छात्र को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया और उसका नामांकन निरस्त करने के साथ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर कर्लनगंज थाने में दे दी। छात्र को सुनवाई का मौका देते हुए कहा गया है कि वह दो नवंबर को शाम चार से पांच बजे के बीच अपने पिता या संरक्षक के साथ चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छेड़खानी की घटना आम है लेकिन बीएचयू की घटना सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अब ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय में माह भर में छेड़खानी का यह दूसरा मामला सामने आया है। इससे पहले भी स्नातक के एक छात्र पर छेड़खानी का आरोप लगा था और प्रथम दृष्टया घटना को सही पाते हुए आरोपी छात्र को निष्कासित कर दिया गया था। उस छात्र को भी सुनवाई का मौका दिया गया था। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि इससे पहले हुई घटना में आरोपी छात्र ने अपना पक्ष रखा था लेकिन वह अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर सका। उनका मामला कमेटी में विचाराधीन है और निष्कासन बरकरार है।