झूंसी के शेरडीह गांव के पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव और पारसनाथ यादव के बीच कछार की जमीन को लेकर एक दशक पहले झगड़ा शुरू हुआ था लेकिन समय के साथ यह विवाद पीछे छूट गया। दोनों परिवार चुनावी रंजिश और वर्चस्व को लेकर एक दूसरे के खून को प्यासे बने रहे। पारसनाथ का बेटा योगेंद्र उर्फ बच्चा यादव चंद्रभान उर्फ बाबा को हराकर गांव का प्रधान बन गया था। बताया जाता है कि इसी दौरान योगेंद्र ने एक बार चंद्रभान यादव को गांव में लात-घूंसों से पीटकर काफी बेइज्जत किया था। चंद्रभान इसका बदला लेना चाहता था।
10 जुलाई 2005 को योगेंद्र उर्फ बच्चा यादव गांव के प्राथमिक विद्यालय में वजीफा बांट रहा था, तभी गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में चंद्रभान, उसके बेटे राजेश यादव, राजकुमार यादव, संतोष यादव और ज्ञानचंद्र उर्फ वकील नामजद हुए। योगेंद्र की हत्या के बाद उसकी पत्नी प्रधान बनी। 2008 में योगेंद्र के भाई धर्मेंद्र की भी हत्या कर दी गई। धर्मेंद्र की हत्या के बाद उसकी पत्नी ऊषा प्रधान हो गई। धर्मेंद्र की मौत के बाद ऊषा ने देवर शैलेंद्र से शादी कर ली।
दोहरे क त्ल के बाद दोनों परिवारों में रंजिश और बढ़ गई। चंद्रभान और उसका बेटे जेल में बंद हैं। गांव में शैलेंद्र पक्ष ने वर्चस्व कायम कर लिया। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में दोनों परिवार एक बार फिर आमने-सामने हुए। जिसमें चंद्रभान की पत्नी सरस्वती विरोधी गुट की ऊषा देवी को हराकर प्रधान बन गई। यह बात शैलेंद्र पक्ष को पच नहीं रही थी। वे दो भाइयों की हत्या और प्रधानी के चुनाव में मिली हार का बदला लेने की फिराक में थे। चुनाव में हार से शैलेंद्र पक्ष का वर्चस्व गांव में डगमगाने लगा था। चर्चा है कि गांव में वर्चस्व कायम रखने और भाइयों की हत्या का बदला लेने के लिए ही रविवार शाम हुए कत्लेआम को अंजाम दिया गया है।
नैनी जेल रोड पर रविवार शाम जब बाइक सवार बदमाश सफारी सवार लोगों को घेरकर फायरिंग और बमबाजी कर रहे थे, तश्रसर चौकी प्रभारी बैरहना शैलेश कुमार सिंह अपनी कार से गुजर रहे थे। भीड़ और अफरातफरी देख दरोगा कार से उतर गए। बावर्दी दरोगा को देख बदमाशों ने समझा कि पुलिस आ गई। इस पर एक बदमाश की घबराहट में पिस्टल सड़क पर गिर गई। बदमाश फायरिंग करते हुए खरकौनी की ओर भाग निकले। बताया जाता है कि चौकी प्रभारी न पहुंचते तो बदमाशों की ओर से हो रही फायरिंग और बमबाजी न रुकती। जिसमें कई और की जान जा सकती थी। चौकी प्रभारी शैलेश कुमार सिंह जेल में बंद कुलदीप शुक्ला और विष्णु पंडित का बयान लेने जा रहे थे। वह घायलों को उनकी सफारी से लेकर नैनी पुलिस के साथ अस्पताल ले आए। उन्होंने ही पुलिस को सूचना दी थी।