नोटबंदी के बाद से हालात दिन पर दिन बदतर ही होते जा रहे हैं। इधर तीन दिनों से बैंक बंद रहे तो स्थिति कई जगहों पर बेकाबू हो गई। अल्लापुर, सलोरी और बघाड़ा में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एटीएम ही तोड़ दिया। नाराजगी इस बात की कि बैंक तो बंद हैं ही, एटीएम भी पैसा नहीं दे रहे। मामूली रकम के लिए पूरे शहर का चक्कर लगाना पड़ता है और तब भी पैसा नहीं मिलता।
दरअसल, अल्लापुर में बड़ी संख्या में छात्र किराए पर रहते हैं। इनमें विश्वविद्यालय में पढ़ने वालों के अलावा बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र भी हैं। नोटबंदी के बाद छात्रों के लिए भी मुश्किल खड़ी हो रही है। खाते में पैसे तो हैं मगर निकाल नहीं पा रहे। सामान्य खर्च के लिए पूरे दिन लाइन में लगना पड़ता है और जरूरी नहीं कि पैसा मिल ही जाए। सोमवार को बैंक बंद रहे मगर छात्रों को उम्मीद थी कि बैंकों ने व्यवस्था की होगी और एटीएम में जरूर पैसा मिलेगा। यहां एसबीआई और एक्सिस बैंक के एटीएम पर छात्र लाइन में लग गए। घंटों इंतजार के बाद भी पैसा नहीं मिला तो वे आपे से बाहर हो गए। दोनों एटीएम पर तोड़फोड़ कर दी। छात्रों का कहना था कि जब एटीएम लोहे का बक्सा बनकर रह गए हैं तो इन्हें तोड़ देना ही ठीक है। सलोरी और बघाड़ा में भी छात्रों ने एटीएम तोड़ दिया।
विवि में पढ़ाई करने वाले छात्र और प्रतियोगी परीक्षार्थी, दोनों पैसे की कमी से परेशान हैं। कई के सामने तो मेस का बिल भरना भी बड़ी समस्या बन गई है। इसके अलावा पढ़ाई-लिखाई का खर्च तो है ही। बैंक और एटीएम दोनों की व्यवस्था बदहाल है, इससे नगदी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। परेशान बहुत से छात्र अब घर लौटने लगे हैं। डेलीगेसी एवं छात्रावासों के बाहर चायपान की दुकानों पर दिखने वाली छात्रों की भीड़ भी कम हो गई है।
तीन दिन बाद आज बैंक खुल रहे हैं और भारी भीड़ उमड़ने के आसार हैं। बीते शुक्रवार को जब बैंक बंद हुए थे तो अधिकतर बैंक नगदी संकट से जूझ रहे थे। पैसे के लिए लोग दिन भर लाइन लगाते रहे मगर अधिकतर निराश ही हुए। उसके बाद से स्थिति और बिगड़ी है। बैंक तो बंद हुए ही एटीएम भी दगा दे गए। इन तीन दिनों में कैश की किल्लत से लोग बेहाल हो गए। अब लोगों को उम्मीद है कि मंगलवार को जब बैंक खुलेंगे तो थोड़ी राहत मिलेगी।
बैंकों में नगदी संकट का असर कर्मचारियों और पेंशनरों पर भी गहरा पड़ा है। माह की शुरुआत में वेतन, पेंशन आने के बाद भी कोई जरूरी धनराशि नहीं निकाल सका। हवाला दिया गया कैश लिमिट का। करीब-करीब रोज ही बुजुर्ग पेंशनर लंबी लाइन में लगकर बैंक पहुंचे मगर कैश की बजाय धक्के मिले। अब मंगलवार को बैंक खुलेंगे तो नगदी निकालने पहुंचने वालों में बड़ी संख्या इनकी भी होगी। वैसे तो कई बैंकों ने पेंशनरों के लिए अलग व्यवस्था का खोखला दावा किया था लेकिन हकीकत ठीक इसके उलट दिखी। अभी जिस तरह का रवैया बैंकों का है, उससे लगता नहीं कि इनकी मुश्किलें कम होंगी।