फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आतंक का पर्याय बने अफगानी छात्र

Fri, 18 Mar 2016 02:17 AM IST
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
क्राइम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
पढ़ाई के लिए आए अफगानी छात्र स्थानीय लोगों के लिए आतंक का पर्याय बनते जा रहे हैं। उनका खौफ इस कदर है कि भारतीय छात्र अपने ही देश में उनके आगे बेबस, लाचार हैं। इनसे शिक्षण संस्थानों को फीस के रूप में मोटी रकम मिलती है। इसलिए उन्हें संस्थानों का पूरा समर्थन मिलता है। वहीं विदेशी व मित्र देश का नागरिक होने का फायदा उठाकर वे जिला और पुलिस प्रशासन को भी धौंस दिखाने से नहीं डरते। उनका मनोबल इस कदर बढ़ा हुआ है कि मुट्ठी भर होने के बावजूद बहुसंख्यक भारतीय छात्र तो उनसे खौफजदा रहते ही हैं, पास-पड़ोस के प्रमुख बाजारों में भी उनसे मारपीट की घटनाएं आम हैं। चौंकाने वाली बात यह भी कि मारपीट की घटनाओं की मुख्य वजह छेड़खानी है।
विज्ञापन


बीते दिनों सैम हिग्गिन बॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेकभनोलॉजी एंड साइंसेज (शियाट्स) में अफगानी और भारतीय छात्रों के बीच मारपीट का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में छात्राओं पर अश्लील टिप्पणी और विरोध पर मारपीट की एक और घटना सामने आ गई।

संस्थान या परिसर से अफगानी छात्रों की ओर से इस तरह से छेड़खानी तथा मारपीट की यह मात्र दो घटनाएं ही नहीं हैं। ज्यादातर अफगानी छात्र कई लॉज में एक साथ रहते हैं। उनका ज्यादा समय नशा, अड्डेबाजी, छेड़खानी सहित अन्य अनैतिक कामों में बीतता है। इसे लेकर नैनी बाजार में मारपीट, तोड़फोड़ की घटनाएं आम हो गई है। एडीए कालोनी में रहने वाले केके श्रीवास्तव कहते हैं, अफगानी छात्रों से लोग इस कदर सहमे हैं कि उनका झुंड दिख जाए तो खरीदारी का इरादा बदल देते हैं। एक दुकानदार ने बताया कि अब स्थिति काफी बिगड़ गई है।
विज्ञापन


विदेशी छात्र हैं, इसलिए पुलिस भी उन्हीं का साथ देती है लेकिन अब उनसे निपटने के लिए दुकानदारों ने संगठन बना लिया है। सिविल लाइंस इलाके में भी अफगानी छात्रों की स्थानीय लोगों तथा दुकानदारों से कई बार मारपीट हो चुकी है। सिविल लाइंस के एक होटल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अफगानी छात्रों ने लगातार दो वर्ष वार्षिक समारोह किए लेकिन दोनों ही वर्ष जमकर बवाल तथा मारपीट की घटनाएं चर्चा में रहीं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एमएनएनआईटी समेत शहर के अन्य शिक्षण संस्थानों में कई देशों के विद्यार्थी पढ़ते हैं लेकिन अफगानी छात्र ही ऐसे हैं, जिन्होंने बकायदा संगठन बना रखा है। वे लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और मारपीट या अन्य किसी विवाद में एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। एमएनएनआईटी में भी दबाव बढ़ाने के लिए अन्य संस्थानों के अफगानी छात्र पहुंचे थे। हालांकि संस्थान प्रशासन ने उन्हें गेट से ही वापस कर दिया था। गौरतलब है कि भारत में दाखिला लेने में भी वे एक-दूसरे की मदद करते हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ने के पीछे एक कारण यह भी है।

भारतीय संस्थानों में विदेशी छात्र-छात्राओं के प्रवेश की दो व्यवस्था है। भारत तथा अन्य देशों के बीच हुए समझौतों के अलावा फेलोशिप एवं छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत प्रवेश होते हैं। इसमें भारत सरकार हर स्तर पर छानबीन के बाद चयनित विद्यार्थियाें की सूची उपलब्ध कराती है। इनकी पढ़ाई पूरी तरह से मुफ्त होती है। कई को फेलोशिप भी मिलती है। इसके अलावा कई विद्यार्थी खुद के खर्च पर भी दाखिला लेते हैं। हालांकि भारत सरकार की ओर से पूरी छानबीन के बाद ही इन्हें दाखिला दिया जाता है। वैसे अराजकता बढ़ने के बाद ज्यादातर सरकारी संस्थानों ने सीधे तौर पर विदेशी विद्यार्थियों का प्रवेश लेने पर कमी कर दी है। इसके विपरीत निजी संस्थानों में ऐसे ही विद्यार्थियों की संख्या अधिक है।

किसी तरह की अनुशासनहीनता या अराजकता के मामले में पकड़े जाने पर भारतीय छात्र-छात्राओं की तरह विदेशी विद्यार्थियों के साथ भी कार्रवाई का प्रावधान है। आरोप सिद्ध होने पर शिक्षण संस्थान और पुलिस प्रशासन उन्हें वापस भेज या गिरफ़्तार भी कर सकती है लेकिन हर तरह की कार्रवाई की जानकारी दूतावास को भेजनी होगी। इसके अलावा विदेशी छात्र होने की वजह से मामले के तूल पकड़ने की भी आशंका होती है। इसलिए संस्थान और पुलिस प्रशासन कार्रवाई से बचता है। इसी की आड़ में अफगानी छात्रों का मनोबल बढ़ गया है।

भारतीय और अफगानी छात्रों के बीच मारपीट की घटना को मोतीलाल नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के अफसर गंभीर मामला नहीं मान रहे। जबकि, इसी आग की तपिश में झुलस रहे शियाट्स के अफगानी तथा अन्य संस्थान के छात्र भी एमएनएनआईटी तक पहुंचे थे। गेट पर खड़े सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता नहीं दिखाई होती तो विवाद बढ़ गया होता। हालांकि अब विवाद बढ़ने के बाद संस्थान प्रशासन की ओर से जांच बिठा दी गई है। मारपीट में शामिल दोनों पक्षों के विद्यार्थियों के साथ अफसरों से भी बृहस्पतिवार को पूछताछ की गई। संस्थान में शुक्रवार से होली की छुट्टी हो जाएगी। इसकी वजह से ज्यादातर भारतीय विद्यार्थी बृहस्पतिवार को ही घर रवाना हो गए। इसलिए मौके पर मौजूद अन्य विद्यार्थियों से पूछताछ नहीं हो पाई।

संस्थान में वार्षिक समारोह कलरव दो अप्रैल से शुरू होगा। मंगलवार को इसके अभ्यास के दौरान बीटेक प्रथम वर्ष के अफगानी छात्रों ने छात्राओं पर कमेंट कर दिया। बीटेक  अंतिम वर्ष के छात्रों ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई। मौके पर पहुंचे शिक्षकों और अफसरों ने मामला शांत कराया। समझौता कराने की भी बात कही जा रही है लेकिन बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय, शियाट्स समेत अन्य संस्थानों के अफगानी छात्रों के समर्थन में एमएनएनआईटी पहुंचने से तनाव बढ़ गया।
हालांकि उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया लेकिन भारतीय छात्र-छात्राओं की नाराजगी बढ़ गई है। संस्थान प्रशासन की ओर से मामले को दबाने की लगातार कोशिश की गई लेकिन विवाद बढ़ता ही गया। इसके बाद चीफ प्रॉक्टर की अध्यक्षता में जांच शुरू करा दी गई है। इसी सिलसिले में अफगानी तथा अन्य छात्रों से पूछताछ हुई। मौके पर पहुंचे अफसरों से भी जानकारी ली गई। निदेशक प्रोफेसर पी.चक्रवर्ती कहते हैं,  इसे शियाट्स या अन्य संस्थान की घटनाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पूछताछ की जा रही है लेकिन गोपनीयता की बात कहकर उन्होंने जांच की जानकारी देने से मना कर दिया।

अफगानी छात्राें के साथ मारपीट के बाद एमएनएनआईटी के विद्यार्थी दहशत में हैं। उन पर संस्थान की ओर से चुप रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि आयोजन से जुड़े विद्यार्थी भी इस मामले में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। एक छात्र का कहना था कि पूरी घटना से अफसरों को अवगत करा दिया गया है। बेहतर हो इस बारे में निदेशक तथा अन्य शिक्षकों से ही बात की जाए।

शियाट्स में भारतीय और अफगानी छात्रों के बीच मारपीट का मामला शांत होता नहीं दिख रहा। हालांकि संस्थान प्रशासन की ओर से जांच के साथ दोनों पक्षों के बीच समझौते की भी कोशिश की जा रही है लेकिन कई भारतीय छात्र इसके लिए तैयार नहीं है। वे अफगानी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उधर, अफगानी छात्र फरार बताए जा रहे हैं जबकि सूत्रों के मुताबिक वे नैनी में ही एक लॉज में रह रहे हैं।

जेएनयू मामले को लेकर शियाट्स के भारतीय छात्रों की ओर से 25 फरवरी को राष्ट्रीय एकता मार्च निकाला गया था। अफगानी छात्रों ने इसकी वीडियो तैयार कर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उसे उन्होंने सोशल मीडिया पर भी डाल दिया था। इससे तनाव बढ़ा और अगले दिन काफी मारपीट भी हुई। इसके बाद संस्थान बंद कर दिया गया लेकिन एक मार्च को खुलने पर दोनों पक्षों के बीच फिर जमकर मारपीट के साथ तोड़फोड़ भी हुई। संस्थान प्रशासन की ओर से इस आरोप में भारतीय छात्रों के खिलाफ एफआईआर लिखाई सहित जांच भी बिठाई गई है। बताया जा रहा है कि संस्थान प्रशासन के दबाव पर नामजद कई भारतीय छात्र समझौता के लिए तैयार हो गए हैं लेकिन तीन विद्यार्थी मांग पर अड़े हैं। वे भारत को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले अफगानी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रति कुलपति प्रोफेसर एसबी लाल का कहना है कि जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया।

ज्यादातर अफगानी छात्रों को हॉस्टल रास नहीं आता। शियाट्स में विदेशी छात्रों के लिए इंटरनेशनल हॉस्टल है लेकिन वे उसमें नहीं रहना चाहते। एक शिक्षक का कहना है कि वे जो चाहते हैं, वह शिक्षण संस्थान की सीमा में संभव नहीं है। संस्थान तथा स्थानीय लोगों के अनुसार अफगानी छात्रों को यमुना पुल पर अड्डेबाजी, नशा सहित तमाम तरह के अनैतिक कामों का शौक है, जो हॉस्टल में संभव नहीं है। इसलिए उन्हें बाहर लॉज में रहना ही अच्छा लगता है।

इलाहाबाद। भाजपा विधि एवं विधायी प्रकोष्ठ की ओर से अफगानी छात्रों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जाने की घोषणा की गई है। महानगर इकाई की बैठक में संयोजक श्रवण दुबे ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अक्षमता के कारण अफगानी छात्रों का तांडव बढ़ता जा रहा है। शियाट्स प्रकरण के दोषी अफगानी छात्रों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में रोष है। एमएनएनआईटी में भी भारतीय विद्यार्थियों के साथ अफगानी छात्रों कीमारपीट दुर्भाग्यपूर्ण है। कलेक्ट्रेट के घेराव में कई संगठनों के अधिवक्ता भी शामिल होंगे।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें