राष्ट्रगान पर पाबंदी लगाने वाले स्कूल पर कार्रवाई के बाद दो पक्षों में टकराव के चलते इलाके में तीसरे दिन भी पुलिस और पीएसी मुस्तैद रही। इलाके में कम ही लोग घरों से बाहर निकले, जो निकले भी वे काम पर चले गए या पुलिस दल को देख लौट गए। शिक्षा विभाग की टीम ने पुलिस की मदद से स्कूल की तलाशी लेकर कागजातों की जांच-पड़ताल की।
एमए कान्वेंट स्कूल में राष्ट्रगान पर रोक की बात उजागर होने के बाद से कर्नलगंज का सादियाबाद मोहल्ला पांच दिनों से सुर्खियों में है। रविवार शाम स्कूल प्रबंधक जियाउल हक और स्थानीय लोगों के बीच मारपीट और पथराव से तनाव बढ़ गया था। स्कूल प्रबंधक और स्थानीय पार्षद मकसूद की उग्र भूमिका से लोगों में नाराजगी को देखते हुए स्कूल के आसपास पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती कर दी गई। पु्लिस-प्रशासनिक अफसरों को खतरा सता रहा था कि कहीं स्कूल का मसला बड़े उत्पात में न तब्दील हो जाए।
हालांकि, सोमवार को झड़प के अलावा लोगों की सूझबूूझ के चलते माहौल शांत रहा। ऐसे में मंगलवार को आरएएफ हटाकर वहां चार थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी को मुस्तैद कर दिया गया। स्कूल के आसपास दरोगा और सिपाही टहलते रहे, जिससे वहां माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं रहा। लोग घरों में दुबके रहे। इसी बीच दोपहर में शिक्षा विभाग की टीम सील किए जा चुके स्कूल में पहुंची। टीम ने पुलिस की मदद से कार्यालय खोलकर वहां रखे दस्तावेजों की जांच की। कुछ कागजात छानबीन के लिए जब्त भी किए गए। देर शाम वहां पुलिस बल में कमी कर दी गई।
सील हुए एमए कान्वेंट स्कूल के पास रहने वाले कई लोगों ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अपने मोहल्ले में अमन और सौहार्द चाहते हैं। स्कूल के निकट रहने वाले मोहम्मद अरशद ने कहा कि हमें स्कूल प्रबंधक की कारगुजारी से मतलब नहीं। हम सभी चाहते हैं कि मोहल्ले में पहले की तरह भाईचारा बना रहे। इसी मोहल्ले के विनय यादव ने कहा कि जियाउल हक की गतिविधि संदिग्ध रही है। वह किसी से ज्यादा मिलता-जुलता भी नहीं था। उसके चक्कर में मोहल्ले में माहौल खराब हो, यह उचित नहीं है। सभी को पहले की तरह मिलजुलकर रहना चाहिए। इसी मोहल्ले की फौजिया ने भी कहा कि यहां कभी ऐसा तनाव नहीं बना। हमें अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रख शांति बनाकर रखना चाहिए।