पीसीएस-17 गलत पेपर बंटने का मामला
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निजी मुचलके पर रिहा हुए सात प्रतियोगी, ऋचा की नहीं हुई रिहाई
चार छात्र, तीन छात्राएं शामिल, आज मुख्य परीक्षा में होंगे शामिल
पुलिस कर रही है भूमिका की जांच, साथी प्रतियोगी बने गारंटर
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उप्र लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) की 19 जून को हुई परीक्षा निरस्त करने के बाद हुए बवाल के मामले में गिरफ्तार किए गए सात प्रतियोगी छात्र-छात्राएं बुधवार को निजी मुचलके पर रिहा कर दिए गए। पुलिस का कहना है कि घटना में इनकी भूमिका की जांच की जा रही है। फिलहाल परीक्षा को देखते हुए इन्हें रिहा किया गया है। हालांकि इसी मामले में गिरफ्तार की गईं सपा प्रदेश प्रवक्ता ऋचा सिंह को रिहाई नहीं मिल सकी है।
पीसीएस 2017 की मुख्य परीक्षाएं 18 जून से शुरू होकर छह जुलाई तक चलनी हैं। 19 जून को सामान्य हिंदी और निबंध का पेपर होना था। राजकीय इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर सुबह प्रथम की जगह द्वितीय पाली का निबंध का प्रश्नपत्र बांटे जाने पर हंगामा हो गया। जानकारी पर आयोग में भी हड़कंप मच गया। कुछ देर बाद पर्चा व्हाट्सएप पर भी वायरल हो गया। आननफानन में आयोग की ओर से 19 जून की परीक्षा निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। उधर प्रतियोगियों का आरोप था कि साजिशन गलत प्रश्नपत्र बांटा गया, ऐसे में पूरी परीक्षा ही निरस्त कर दी जाए। इसी मांग को लेकर प्रतियोगियों ने आयोग गेट पर पहुंचकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। छह घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा। देर रात आयोग चौराहे के पास एक बस में आग लगा दी गई। इस पर पुलिस ने समाजवादी पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता ऋचा सिंह समेत आठ प्रतियोगियों को हिरासत में ले लिया गया। देर रात इनके खिलाफ बलवा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, मारपीट समेत अन्य धाराओं में सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।
ऋचा के अलावा जिन सात प्रतियोगियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था, उन्हें 21 जून को होने वाली समाज कार्य समेत अन्य विषयों की मुख्य परीक्षा में शामिल होना था। ऐसे में साथी प्रतियोगी छात्र बुधवार सुबह से ही उन्हें रिहा कराने की कोशिशों में जुट गए। बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र सुबह सात बजे ही एसएसपी नितिन तिवारी से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। साथ ही उनसे परीक्षा की दुहाई देते हुए गिरफ्तार छात्र-छात्राओं की रिहाई की मांग की। जिसके बाद एसएसपी के आदेश पर सिविल लाइंस पुलिस ने निजी मुचलके पर सात प्रतियोगियों को रिहा कर दिया। इस दौरान काफी संख्या में थाने में प्रतियोगी छात्र जुटे रहे।
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस शिवमंगल सिंह ने बताया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है वह बेहद गंभीर हैं। हालांकि उपरोक्त सात प्रतियोगियों की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। परीक्षा को देखते हुए इन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। पुलिस मामले में सातों प्रतियोगियों की भूमिका की जांच में जुटी है। जांच के दौरान मामले में किसी तरह की संलिप्तता पाए जाने पर इन्हें फिर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। इस संबंध में गारंटर बने लोगों ने शपथपत्र दिया है कि उपरोक्त प्रतियोगी जांच में हर तरह से सहयोग करेंगे। साथ ही जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए पुलिस के समक्ष उपलब्ध होंगे। ऋचा सिंह के खिलाफ पुलिस के पास साक्ष्य हैं, ऐसे में उन्हें रिहा नहीं किया गया है।
‘सिर्फ प्रदर्शन में थे शामिल, बवाल में नहीं’
पुलिस सूत्रों की मानें तो गिरफ्तारी के बाद सातों प्रतियोगियों ने खुद को निर्दोष बताया। पूछताछ में पुलिस अफसरों से कहना कि वह केवल शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। आयोग गेट के पास हुए बवाल में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इस बारे में सीसीटीवी फुटेज आदि देखकर पुष्टि की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि प्रतियोगियों के बयान की जांच की जा रही है।
प्लीज, मत छापिए नाम
सिविल लाइंस थाने में मौजूद प्रतियोगियों ने करियर की दुहाई देते हुए मीडिया से अपने नाम न प्रकाशित करने की बात कही। सात में से चार छात्र जबकि तीन छात्राएं हैं। छात्रों को जहां सिविल लाइंस थाने में रखा गया वहीं छात्राओं को रात में आशा ज्योति केंद्र में रखा गया। सुबह बेली अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद छात्राओं को महिला थाने ले जाया गया। इसके बाद उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। तीन छात्राओं में एक हरदोई व एक बहराइच की रहने वाली है। उधर छात्रों में दो शहर के ही जबकि दो क्रमश: गोरखपुर और बस्ती के रहने वाले हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने बढ़ाया हाथ
गिरफ्तार किए गए प्रतियोगी छात्र-छात्राओं की परीक्षा न छूटे, साथ ही उनका भविष्य न बर्बाद हो, इसके लिए प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने हाथ बढ़ाया। मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने बताया कि समिति सदस्यों समेत कुल 14 लोगों ने गारंटर बनकर निजी मुचलका भरा। अवनीश ने बताया कि पीसीएस मेंस 17 परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका को लेकर उन्होेंने पूर्व मेें ही आयोग अफसरों को ज्ञापन सौंपा था। इसके बावजूद लापरवाही की गई। नतीजतन इतनी बड़ी घटना हुई और हालात यह बने कि परीक्षा निरस्त करनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा में जिस तरह की गड़बड़ी सामने आई , उससे किसी साजिश की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह भेेजी गई जेल
इलाहाबाद। पीसीएस की मुख्य परीक्षा में पेपर निरस्त किए जाने के बाद हुए बवाल और बस जलाने की घटना में गिरफ्तार इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह को पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उनको न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। उनकी ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। यह आदेश प्रभारी सीजेएम ने दिया है। लोक सेवा आयोग में चल रही पीसीएस मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र निरस्त किए जाने के बाद छात्रों द्वारा विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान हंगामा कर तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें पुलिस ने विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।