ठेकेदार के बेटे के अपहरण का मामला
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घर लौटने के बाद मां-बाप संग साझा किए ‘वो चार घंटे’
फायरिंग शुरू होने पर सीट के नीचे छुपकर बचाई जान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। करीब चार घंटे अपहरणकर्ता के चंगुल में रहने और आंखों के सामने फिल्म सरीखा लाइव एनकाउंटर देखने के बाद भी मासूम रणवीर के भीतर उस घटना को लेकर कोई खौफ नहीं था। घर पहुंचने के बाद बच्चे ने पूरी घटना के बारे में बताते हुए कहा- ‘वह हॉल में जिम्नास्टिक कर रहा था तभी संजू अंकल ने बर्थडे गिफ्ट दिलाने के लिए साथ चलने को कहा। कार में बिठाने के बाद उसे कई कुरकुरे और चिप्स के पैकेट दिलाए। कार में ही उन्होंने शराब भी पी। यहां से तेजी से कार चलाते हुए वह गांव सोरांव में अपनी बुआ के पास पहुंच गए। बुआ से अंकल ने पैसे मांगे लेकिन, बुआ ने पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद वह गांव से निकल आए। गांव से निकलने पर पुलिस दिखाई पड़ी। पुलिस की गाड़ी दिखने पर अंकल ने अपनी गन निकाल ली। उनकी गन बहुत सुंदर थी। पुलिस के आने पर संजू अंकल मुझसे पुलिस को रोकने के लिए कहने लगे। मुझे कई बार कार की खिड़की पर ले जाकर पुलिस को वापस जाने के लिए कहलाया’।
इसके बाद पुलिस ने गोली चलाकर गाड़ी का टायर पंचर कर दिया। जब पुलिस की ओर से गोलियां चलाई जाने लगीं तब रणवीर तुरंत सीट के नीचे छुप गया। फायरिंग के बीच ही जब आगे जाने का रास्ता बंद हो गया तब संजू ने गाड़ी छोड़ दी और पैदल भागने लगा लेकिन, रणवीर कार के भीतर ही छुपा रहा। संजू के ढेर होने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम के साथ मौजूद उसके फूफा शीबू ने उसे बाहर निकला। रात करीब ढाई बजे पिता अभिषेक अपनी कार से घटनास्थल पर पहुंचे और वहां से रणवीर को लेकर लौटे आए।