2012 से ही तनाव-दबाव में हैं एजी ऑफिस के कर्मचारी
0 अरविंद की मौत से सहमे कर्मचारी, आरोपी अफसर पर हो चुका है हमला
0 विगत छह वर्षों में कई कर्मचारियों की हो चुकी है असामयिक मौत
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। एजी ऑफिस में सात मंजिल से गिरकर अरविंद कुमार की हुई मौत के बाद कर्मचारी डरे और सहमे हुए हैं। कार्रवाई की डर से उन्होंने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। उनके भय को इससे ही समझा जा समझा जा सकता है कि कर्मचारी नेता मीडिया के लोगों से मिलने तक के लिए तैयार नहीं हैं। कुछ बोलना तो दूर की बात है। पूरी घटना पर एजी ऑफिस के अफसरों से वार्ता की कोशिश की गई लेकिन, उन्होंने मिलने से इंकार कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कर्मचारियों का कहना है कि अरविंद ने आत्महत्या की है। परिसर में चर्चा है कि एक अफसर से विवाद हो गया था, जिससे वह सदमे में था। परिसर में एक अफसर के व्यवहार को लेकर कर्मचारियों में काफी नाराजगी दिखी। आरोपी अफसर पर पूर्व में हमला भी हो चुका है लेकिन, सहमें कर्मचारी व्यवस्था के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं। उनमें यह डर और भय 2012 से कायम है। छह साल पहले एजी ऑफिस में गेट बंद करने की व्यवस्था लागू कर दी गई। इसके तहत कर्मचारियों का सुबह 9.30 बजे परिसर में पहुंचना अनिवार्य हो गया और इसके बाद बाहर नहीं निकल सकते। कर्मचारियों ने उन दिनों इसका तीव्र विरोध किया था। इसके बाद चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। कई का डिमोशन भी कर दिया गया। इन कार्रवाइयों तथा वर्तमान व्यवस्था से उनमें घोर निराशा और भय व्याप्त है। इन छह वर्र्षों में मशहूर शायर ख्वाजा जावेद, रंगकर्मी एससी होर, साहित्यकार शिवकुटी लाल वर्मा के पुत्र श्याम प्रकाश, गुलाब चंद्र सुमन समेत कई कर्मचारियों की असामयिक मृत्यु भी हो चुकी है। अरविंद के निधन के बाद समय से पूर्व हुए इन कर्मचारियों की मौत पर भी एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। इनके अलावा प्रदीप शीट को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। इसके बाद उनकी माताजी का निधन हो गया था। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदीप को रिटायर किए जाने से वह दुखी थीं। इसकी वजह से उन्हें हार्टअटैक पड़ा और मौत हो गई। इसके विपरीत एजी ऑफिस के कर्मचारी इस बारे में जवाब देना तो दूर मिलने तक के लिए तैयार नहीं हैं।