कलेक्ट्रेट के सामने किसान का शव रख चक्काजाम
- बुधवार को बहरिया जाते समय गाड़ी पलटने से हुई थी मौत
- आरोप है अस्पताल में घायलों का नहीं हो रहा सही इलाज
- सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने मदद और इलाज का भरोसा दिया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
चाका ब्लाक पर प्रदर्शन के बाद बहरिया लौटते वक्त बुधवार शाम गाड़ी पलटने से आशाराम की मौत और कई लोगों के घायल होने से किसानों में नाराजगी है। गुस्साए किसानों ने बृहस्पतिवार शाम पोस्टमार्टम के बाद आशाराम का शव कलेक्ट्रेट गेट पर रखकर जाम लगा दिया। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए मृतक के परिवार को मुआवजा तथा घायलों के समुचित इलाज की मांग की। मौके पर पहुंचे अफसरों ने किसानों को आश्वासन समझाया।
बहरिया के करीब 35 महिलाएं-पुरुष बुधवार को मंदसौर की घटना के विरोध में चाका ब्लाक पर प्रदर्शन के बाद लौट रहे थे, तभी थरवई में उनकी गाड़ी (मालवाहक मैजिक) बेकाबू होकर पलट गई थी। इस घटना में अभईपुर गांव के आशाराम (45) की मौत हो गई थी, जबकि 31 महिलाएं पुरुष जख्मी हुए। उन्हें अलग-अलग अस्पताल में भर्ती किया गया है। पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार शाम करीब पांच बजे किसानों ने आशाराम का शव जिलाधिकारी कार्यालय के गेट के सामने रखकर चक्काजाम कर दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि दुर्घटना में एक किसान की मौत हो गई, 31 लोग घायल हुए। 28 लोग बेली अस्पताल में भर्ती हैं। गंभीर घायल तीन लोगों जसमती सरोज, शांति विश्वकर्मा, सूबेदार यादव स्वरूपरानी नेहरू में जीवन-मौत से जूझ रहे हैं, मगर उनका सही इलाज नहीं हो रहा है। दवाएं तक बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। जिला पुलिस-प्रशासन से उन्हें कोई देखने तक नहीं आया। कलेक्ट्रेट पर चक्काजाम की खबर पाकर सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर और सीओ कर्नलगंज पुलिस बल के साथ पहुंच गए। अफसरों ने किसानों से बात की। फिर एसडीएम फूलपुर को निर्देश दिया कि वे मृतक किसान के परिवार के लोगों से मिलकर आर्थिक सहायता की कार्यवाही करें। सीएमओ को भी सिटी मजिस्ट्रेट ने फोन पर कहा कि वह अस्पताल में भर्ती घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था करें। इसके बाद किसान नेता सालिगराम यादव के समझाने पर शव उठाकर लोग वहां से गए तब जाकर घंटे भर बाद यातायात सुचारु हो सका।