फोन करने वाले ने अनुपम के सीने और सिर पर चाकू से एक बाद एक कई वार कर दिए। जब तक गार्ड तथा अन्य लोग पहुंचते, हत्यारा भाग निकला था। अनुपम को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह कोमा में चला गया था। कुछ दिन बाद अनुपम की अस्पताल में ही मौत हो गई। हत्याकांड की जांच में जुटी पुलिस ने जब अंतिम कॉल करने वाले को ट्रेस करना चाहा तो पता चला वह नंबर फर्जी आईडी से लिया गया था। अनुपम का लैपटाप चेक किया गया। उसकी नई नवेली पत्नी की मोबाइल कॉल डीटेल्स निकाली गई लेकिन कहीं से कुछ भी नहीं पता चल रहा था।
कातिल ने कहीं भी सुराग का एक कतरा भी नहीं छोड़ा था। हार कर पुलिस लखनऊ स्थित अनुपम के घर पर पहुंची। वहां बताया गया कि अनुपम की हत्या की खबर के बाद उसकी पत्नी मायके चली गई थी। बहरहाल पुलिस ने उसे अनुपम के कमरे की तलाशी ली। वहां अनुपम का पर्सनल कंप्यूटर था। पुलिस ने जब ई मेल चेक किया तो उस पर अनुपम की पत्नी ने भी लागिन कर रखा था। पुलिस ने तकनीशियनों के सहारे दोनों के पासवर्ड क्रैक किए। इसी कंप्यूटर में अनुपम की हत्या का पूरा राज मिल गया।
दरअसल सिमरन सुहागरात पर अपने कुछ वीडियो बनाकर अपने एक दोस्त को ईमेल से सेंड किया था। हालांकि वह ईमेल भी फर्जी नाम से था लेकिन आईपी एड्रेस के सहारे भोपाल के प्रदीप शर्मा तक पहुंच गई। पुलिस जब उसके घर पहुंची तो वह नहीं मिला। शक यकीन में बदलने लगा। फिर उसके दूसरे मोबाइल नंबर का पता चला जिससे वह अपनी दोस्त सिमरन से लगातार बात करता था। इसके बाद सिमरन से पूछताछ शुरू हुई। पहले तो उसने साफ साफ इनकार किया लेकिन पुलिस ने जब उसके ही भेजे वीडियो उसको दिखाया तो उसने जुर्म कुबूल कर लिया।
उसने बताया कि वह बचपन से ही प्रदीप से प्यार करती थी। उसी से शादी करना चाहती थी लेकिन प्रदीप कुछ करता नहीं था। इसलिए घर वालों ने उसकी शादी लखनऊ में अनुपम के साथ कर दी। उसने हमेशा प्रदीप को ही अपना हमसफर माना था। धूमनगंज पुलिस ने सिमरन को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद प्रदीप की तलाश शुरू हुई। उसे भी पकड़ लिया। उसने जुर्म कुबूलते हुए बताया कि सिमरन उसी की थी। कोई भी उसे नहीं छीन सकता था। अनुपम की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने सिमरन से शादी की। इसीलिए उसे शादी से ठीक एक महीने बाद मार दिया।