आपदा में अवसर कैसे ढूंढा जाता है, यह नजारा फाफामऊ घाट पर देखा जा सकता है। घाटियों के जरिए कोरोना से मरे लोगों के शव का अंतिम संस्कार करवाने में साढ़े हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। बीते चार माह से जारी अवैध वसूली को लेकर कई परिवारों की ओर से आपत्ति जताई गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कोविड संक्रमण से रसूलाबाद के रहने वाले एक 62 वर्षीय कारोबारी की शनिवार को मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार कराने में अफसरों ने घाटिये के जरिए साढ़े छह हजार रुपये वसूले। मृतक के भाई ने बताया कि इसमें 4500 रुपये लकड़ी जलाने के, एक हजार रुपये डोम के और एक हजार रुपये किट के लिए लिए गए। इससे पहले एसआरएन में शव को पोस्टमार्टम हाउस से 108 नंबर की एंबुलेंस में लादने के लिए 500 रुपये कर्मचारियों ने लिए।
इस तरह से उनसे कुल सात हजार रुपये वसूले गए, जबकि शव को जलाने में चार कुंतल लकड़ी ही पर्याप्त होती है और उसकी पांच सौ रुपये कुंतल के हिसाब से दो हजार रुपये कीमत होती है। इसी प्रकार झूंसी से आए एक दूसरे कोविड मृतक के परिजनों से 7500 रुपये की वसूली की गई। शोक संतप्त परिवारों से अवैध वसूली का खेल अफसरों की मिलीभगत से एक घाटिए के जरिए चल रहा है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता संजय पांडेय ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु कोविड की चपेट में आने से हुई। उनसे भी शव जलवाने के लिए दो हजार रुपये लिए गए, जबकि लकड़ी का खर्चा उन्होंने अलग से दिया था।
- अंतिम संस्कार के नोडल इंचार्ज गंगाराम गुप्ता का कहना है कि घाट पर शव जलाने के लिए लकड़ी और डोम के खर्च की व्यवस्था शासन की ओर से नहीं की गई है। घाट पर शव को पहुंचाने और वहां उतरवाकर चिता पर रखने की व्यवस्था प्रशासन की तरफ से रहती है। इसके लिए कोविड मृतक के परिजनों को कोई रकम नहीं देनी होती है। चिकित्सालय से शव रखवाने और किट का पैसा अगर परिजनों से लिया गया तो गलत है। इसकी जांच की जाएगी।