लॉकडाउन में रोजगार की जद्दोजहद के बीच युवाओं में सुंदरता, फैशन जैसे क्षत्रों में कॅरियर बनाने का अधिक क्रेज दिख रहा है। छोटे उद्योग तथा स्वरोजगार की विभिन्न योजनाआें के अंतर्गत इससे संबंधित क्षेत्रों में भी आवेदन आए हैं। बृहस्पतिवार को ई-क्रेडिट कैंप में मुख्यमंत्री योगी ने लाभार्थियों को ऑनलाइन लोन वितरित किए। इसमें प्रयागराज के 22 लाभार्थियों को 90 लाख रुपये ऋण दिया गया।
स्वीकृत लोन में परंपरागत उद्योगों के अलावा ब्यूटी पार्लर, बुटिक, जेंट्स पार्लर, रेडीमेट कपड़ा, पैकेजिंग, मूंज आदि से संबंधित रोजगार शामिल हैं। उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया ने बताया कि अन्य लाभार्थियों के आवेदन पत्रों की जांच की जा रही है। जल्द प्रक्रिया पूरी करके इन्हें भी आर्थिक मदद पहुंचाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत भी 100 से अधिक युवाओं ने आवेदन किया है। इनमें युवाओं ने ब्यूटी पार्लर, जेंट्स पार्लर के अलावा आरओ प्लांट, राइस मिल, बालू से ईंट बनाने, डेयरी जैसे उद्योग लगाने के लिए आवेदन किया है।
उद्योग और स्वरोजगार वाली योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश हैं। इसका नतीजा है कि बैंकों की ओर से लाकडाउन के बावजूद इस वित्तीय वर्ष में 546 युवाओं को 12 करोड़ रुपये के ऋण दिए जा चुके हैं। इसमें मुद्रा, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री स्वरोजगार समेत अन्य सभी योजनाएं शामिल हैं। अग्रणी बैंक प्रबंधक ओएन सिंह का कहना है कि डेढ़ महीने से भी कम समय में 546 उद्योग के लिए ऋण स्वीकृत करना बड़ी उपलब्धि है। इसमें और तेजी लाएगी।
लाकडाउन में उद्योगों को बड़ा नुकसान हुआ है। खासतौर पर, नए उद्योगों के बंद होने की आशंका बन गई है। ज्यादातर ने बैंकों से लोन भी ले रखा है। ऐसे में बैंकों का भी पैसा डूबने की आशंका बन गई है। इन उद्यमियों की मदद के लिए बैंकों की ओर से कोविड-19 योजना लाई गई है। इसके तहत बैंकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त लोन दिया जाएगा।
छोटे और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के केंद्र एवं प्रदेश सरकार की घोषणा से उद्यमियों तथा व्यापारियों के साथ बेरोजगार हुए स्किल्ड लेबर में उम्मीद की किरण जरूर जगी है, लेकिन हस्तशिल्पियों में निराशा है। हैंडलूम यहां का परंपरागत उद्योग रहा है। इसके अलावा गुजरात तथा महाराष्ट्र से आने वाले बड़ी संख्या में श्रमिक वहां वस्त्र उद्योग से ही जुड़े रहे। इसके बावजूद हैंडलूम को लेकर यहां विशेष योजना नहीं होने से उनमें निराशा है। मऊआइमा एक दौर में हैंडलूम का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज उपेक्षा का शिकार है। इसकी वजह से यहां का बड़ा कारोबार महाराष्ट्र के भिवंडी में शिफ्ट हो गया। करीब 200 परिवार वहां चले गए और वहां पावरलूम स्थापित किए।
इसके अलावा बिल में रियायत खत्म होने के कारण लाकडाउन से पहले ही 100 से अधिक पावरलूम संचालकों ने बिजली कनेक्शन कटवा दिया। अब नए परिदृश्य में इस उद्योग को फिर से बढ़ावा देने की मांग उठने लगी है। लाकडाउन में सबकुछ बंद होने के बाद मऊआइमा के जुबैद, इरफान, तौसिफ आदि वापस आ गए हैं। वहां भिवंडी में हैंडलूम से जुड़े रहे। इनका कहना है कि महाराष्ट्र के अलावा गुजारात से भी सैकड़ों लोग आए हैं, जो वहां धागा बनाने, साड़ी पर छपाई आदि काम से जुड़े थे। यदि यहीं पर सरकार मदद करे तो उन्हें वापस नहीं जाना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल्स मजदूर संघ के उपाध्यक्ष रघुनंदन प्रसाद गुप्ता का कहना है कि मेजा कताई मिल वर्षों से बंद हैं। लंबे संघर्ष तथा आश्वासनों के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसे फिर से शुरू कर दिया जाए तो स्किल्ड लेबर का पलायन रुक जाएगा।
नैनी में बंद पड़े या बदहाल हो चुके उद्योगों को फिर से जिंदा करने की मांग भी तेज हो गई है। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है। अध्यक्ष पूर्व मंडलायुक्त आरएस वर्मा ने बीपीसीएल, आईटीआई, टीएसएल, त्रिवेणी इंजीनियर्स वर्क्स, जीईसी, रेयमंड, बैद्यनाथ आदि कंपनियों के लिए आर्थिक मदद की मांग की है। उनका कहना है कि इसके लिए सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी, केशरी देवी पटेल की ओर से पहले लिखा जा चुका है। इन उद्योगों के फिर से पूरी क्षमता के साथ चालू से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा।
सपा नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह ने केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज को सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी बताया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों तक इसका लाभ पहुंचने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कितने लोगों को लोन मिल पाएगा यह देखना होगा। यह भी कहना है कि उद्योगपतियों का जो लोन माफ किया गया है उसे कवर करने की कोशिश मात्र है। उन्होंने बिना गारंटी लोन दिए जाने पर भी सवाल उठाया। सपा नेता विनय कुशवाहा ने इसे सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया।