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Prayagraj News: लोकनृत्यों के नाम रही शिल्प मेले की शाम

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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित 12 दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले के दूसरे दिन की शाम लोकनृत्यों के नाम रही। शनिवार को सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत रायबरेली से आए शीलू सिंह व दल ने आल्हा गायन से की। उन्होंने कहा कि कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए शिल्पकारी के सामान को बढ़ावा देना होगा। एक कलाकार सबसे बड़ा योद्धा होता है।
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शीलू ने आल्हा गीत की शुरुआत जोश भरे अंदाज से की। उनकी पंक्तियों आल्हा ऊदल महोबा वाले जिनके बेडी वाहे तलवार/पृथ्वीराज दिल्ली वाले जब महोबा को लियो घेराय/ नदी बेतवा की घाटिन मा चमके लाखन की तलवार... ने वीर रस का भाव जगाया। इसके बाद अनुज मिश्रा और साथी कलाकारों ने सीता स्वयंवर पर मनमोहक नृत्य नाटिका से दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके बाद दर्शकों ने गुजरात के डांग और राजस्थान के चरी और घूमर नृत्य का आनंद लिया। साथी कलाकारों में प्रीतम दास, आरती बघेल, शिवेंद्र सिंह, श्रेया वर्मा, दिव्यांशी मिश्रा शामिल रहीं। वहीं, जोथानपुइया रेंथले व दल ने मिजोरम के चेरावं लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर अपने प्रदेश की संस्कृति से रूबरू कराया।
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लोगों को लुभा रहा शिल्प मेला
राष्ट्रीय शिल्प मेले में लगे दो दर्जनों से अधिक स्टॉल लोगों को लुभाते रहे। कश्मीर के ड्राई फ्रूट्स, भागलपुरी कलमकारी, मधुबनी साड़ी और सूट, हरिद्वार की जड़ी-बूटी, कर्नाटक के खिलौने, सजावटी सामान, दिल्ली के हैंडी क्राफ्ट और जर्मन सिल्वर-कॉपर की आर्टिफिशियल ज्वैलरी के स्टॉल पर खासी भीड़ रही। खाने-पीने के साथ ही लोग मैदानी कलाकारों की कला का आनंद लेते रहे।
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