राजस्थान भवन के लिए भूमि चयन के निर्देश
राजस्व परिषद के पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि कटरा सवाई जयसिंह के नाम से मौजूद 1263 संपत्तियों में से अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर उपलब्ध रिक्त भूमि का चयन राजस्थान भवन या राजस्थान मंडपम के लिए किया जाए। चयनित भूमि को राजस्थान सरकार को आवंटित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।जयपुर रियासत की ओर से जिन 1263 संपत्तियों पर दावा किया गया है, उनमें कई स्थानों पर मकान और दुकानें बन चुकी हैं। ऐसे में सर्वेक्षण के दौरान संपत्तियों की मौजूदा स्थिति, कब्जेदारी और अन्य विवरण दर्ज किए जाएंगे।
इन इलाकों में होने हैं सर्वेक्षण
जयपुर रियासत की संपत्तियों के दावे के दायरे में कटरा में लक्ष्मी टॉकीज चौराहे से नेतराम चौराहे तक का क्षेत्र, पीला शिवाला गली, मनमोहन पार्क चौराहे से विश्वविद्यालय मार्ग चौराहे तक तथा नेतराम चौराहे से मनमोहन पार्क के बीच का क्षेत्र शामिल है। इन संपत्तियों पर किरायेदारी और कब्जेदारी को लेकर करीब 20 मुकदमे भी चल रहे हैं। सर्वेक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी जाएगी।
कटरा में जयपुर रियासत से जुड़े किरायेदारी, कब्जेदारी के अब भी मुकदमे
राजस्थान सरकार ने जयपुर रियासत की प्रयागराज, आगरा, मथुरा और वाराणसी में मौजूद संपत्तियों को वापस मांगा है। राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव ने संपत्तियों को 1952 में हुए विलय समझौते की अधिसूचना के अनुसार राजस्थान का नाम दर्ज करने के लिए पत्र भेजा है।
राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के पत्र के बाद प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने चारों जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें कहा गया है कि राज्य में विलय के समय समझौते के आर्टिकल 6 (2)-सी के तहत पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों के अधिकार राजस्थान राज्य को दिए जाने हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कटरा में लक्ष्मी टॉकीज चौराहे से लेकर नेतराम चौराहे तक, पीला शिवाला गली में, मनमोहन पार्क चौराहे से लेकर यूनिवर्सिटी रोड चौराहे तक और नेतराम से मनमोहन पार्क चौराहे के बीच जयपुर रिसायत की 35.25 एकड़ जमीन है।
गल्ला मंडी में आज भी लगा है जयपुर रियासत के दफ्तर का बोर्ड
राजस्थान सरकार अब इसी जमीन पर दावा कर रही है जबकि यहां दशकों पुराने निर्माण हैं। इनमें लोगों के घर, दुकानें, मंदिर और बाजार आदि शामिल हैं। जयपुर रियासत की संपत्ति की देखभाल के लिए गल्ला मंडी में एक दफ्तर भी हुआ करता था जो वर्षों से है लेकिन बोर्ड वहां अब भी लगा हुआ है।
इस कार्यालय के पूर्व इंचार्ज के अनुसार, जयपुर रिसायत की कुछ जमीन की रजिस्ट्री भी की जा चुकी है जबकि 80 फीसदी संपत्ति पर किरायेदारी और कब्जे हैं। किरायेदारी और कब्जेदारी को लेकर तकरीबन 20 मुकदमे हैं।
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने संपत्ति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज तलब किए हैं। इसके लिए एक कमेटी गठित होगी जो दस्तावेज की पड़ताल करेगी और संपत्ति की अनुमानित लागत समेत रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी। जिलाधिकारी यह रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजेंगे।