प्रयागराज। विख्यात पथरचट्टी रामलीला की कर्णघोड़ा शोभायात्रा शुक्रवार को कोविड-19 के संक्रमण की वजह से नहीं निकाली जा सकी। परंपरा बचाने के लिए लीला कमेटी की ओर से कर्णघोड़ा का पूजन किया गया। दूरी बनाकर कमेटी के पदाधिकारियों ने आरती उतारी। इसी के साथ घंटे-घड़ियाल बजाकर भगवान राम के प्रति आस्था प्रगट की गई। इस बार पथरचट्टी की रामलीला का मंचन भी नहीं होगा।
रामबाग स्थित पथरचट्टी के भव्य लीला परिसर में शुक्रवार की शाम सात बजे मंत्रोच्चार के साथ कर्ण घोड़ा की सविधि पूजा की गई। शंखध्वनि के साथ आरती उतारी गई। इसी के साथ भगवान के मुकुट पूजन के बाद पथरचट्टी रामलीला कमेटी की ओर से दशहरा पर्व के तहत यह दूसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रतीकात्मक रूप से किया गया। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष पं मुकेश पाठक व महामंत्री विजय सिंह ने कर्ण घोड़ा का माल्यार्पण किया। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पूजा- अर्चना की गई।
पथरचट्टी के इतिहास में यह पहला मौका था जब पथरचट्टी का सुसज्जित कर्ण घोड़ा कोरोना संक्रमण की वजह से बंदिशों के कारण शहर की सड़कों पर नहीं निकाला जा सका। प्रयागराज में पथरचट्टी की कर्णघोड़ा शोभायात्रा को देखने के लिए सड़कों पर भीड़ उमड़ती रही है, लेकिन इस बार यह शोभायात्रा नहीं निकाली जा सकी। कर्णघोड़ा पूजन पूरी भव्यता के साथ बैंडबाजा की भक्तिमय धुनों के साथ किया गया।कमेटी के मीडिया प्रभारी लल्लू लाल गुप्ता सौरभ ने बताया इस बार गाइड लाइन के अनुपालन में ‘कथा रामराज की’ रामलीला का मंचन नहीं किया जाएगा।
अलबत्ता शनिवार से 25 अक्तूबर तक रात आठ बजे से टीवी पर स्काई नेट चैनल केजरिए रामलीला का प्रसारण किया जाएगा। इससे पहले कर्ण घोड़ा का संयोजन वसंतलाल आजाद ने किया। व्यवस्था धर्मेंद्र कुमार भइया जी ने की। इस मौके पर सतीश चंद्र केसरवानी, रमेश कुमार जायसवाल, कन्हैयालाल गुप्ता, विजय वैश्य, सुरेश चंद्र अग्रवाल, गिरधारी लाल अग्रवाल, राजीव गुप्त बिट्टू, रामचंद्र पटेल, पवन सिंह, शैलेंद्र साहू, दिनेश सिंह समेत कमेटी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।