इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में मांगी गई पूरी जानकारी न होने पर नाराजगी जताई है। कहा है कि उत्तर प्रदेश शासन के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से उपस्थित हों।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में मांगी गई पूरी जानकारी न होने पर नाराजगी जताई है। कहा है कि उत्तर प्रदेश शासन के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से उपस्थित हों। यह आदेश न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की एकल पीठ ने राजपाल सिंह की याचिका पर दिया है।
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बदायूं निवासी याची ने डीएम के समक्ष ब्लॉक उसावन के ग्राम रिजोला प्रधान के खिलाफ शिकायत कर जांच की मांग की थी। शिकायत पत्र पर कोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से हलफनामा मांगा था। कहा था कि हलफनामा में प्रधान व वीडीओ के खिलाफ सार्वजनिक धन के गबन, अनियमितिता, शिकायतों का उचित समय में दूर करने की प्रक्रियाओं का विवरण दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि सरकारी योजनाओं के फंड का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। निगरानी की क्या व्यवस्था है, आदि जानकारियां मांगी थीं।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या एक राज्य सरकार की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह हलफनामा केवल कागजी खानापूरी है। इसका जमीनी हकीकत से कोई लेनादेना नहीं है।
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अदालत ने सरकारी अधिवक्ता के अनुरोध पर बेहतर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग (लखनऊ) को निर्देश दिया है कि वे 30 जनवरी-2026 को दोपहर 2:00 बजे अगली सुनवाई में अदालत की सहायता के लिए उपस्थित रहें।