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High Court : निजी विद्यालयों को सरकारी अनुदान मिलना मौलिक अधिकार नहीं, योग्यता पूरी करने पर ही मिलेगा वेतन

Wed, 07 Jan 2026 01:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति के 50 प्रतिशत से अधिक छात्रों वाले निजी प्राथमिक विद्यालयों को सरकारी अनुदान मिलना मौलिक अधिकार नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति के 50 प्रतिशत से अधिक छात्रों वाले निजी प्राथमिक विद्यालयों को सरकारी अनुदान मिलना मौलिक अधिकार नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ग्रांट के दायरे में आने वाले विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को राज्य कोष से वेतन तभी मिलेगा, जब योग्यता पूरी करते हों और उनकी नियुक्ति कानून के अनुसार हुई हो।

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इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अपील स्वीकार्य कर ली। साथ ही निजी प्रबंधन से संचालित मान्यता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों को एकल पीठ की ओर से ग्रांट देने के आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने दिया। मामला बलिया और कौशाम्बी के कुछ निजी प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ा है, जिनके शिक्षक और प्रबंधन समाज कल्याण विभाग से पुनरावर्ती अनुदान (रिकरिंग ग्रांट) और वेतन की मांग कर रहे थे।

बलिया के महामना मालवीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला व संत रविदास प्राथमिक विद्यालय और कौशाम्बी के श्री शिवमंगल चौधरी प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षकों व कर्मचारियों ने 2018 में पहली बार सरकार से अनुदान और वेतन की मांग की थी। राज्य सरकार ने इन मांगों को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ इन लोगों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं। 21 दिसंबर 2022 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शिक्षकों और प्रबंधन के पक्ष में फैसला देते हुए अनुदान और वेतन देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अपील दायर की।
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कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि महामना मालवीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला, बलिया को सरकार की ओर से तीन जनवरी 2024 को दिया गया अनुदान सही है। लेकिन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन तभी मिलना चाहिए, जब यह साबित हो कि नियुक्ति उत्तर प्रदेश अधिनियम-1975 के अनुसार हुई हो। साथ ही शिक्षक एनसीटीई के मानकों के अनुसार योग्य हों और टीईटी उत्तीर्ण हों। वहीं, कोर्ट ने कहा कि आरटीई एक्ट-2009 और अनुच्छेद 21-ए के आधार पर निजी प्राथमिक विद्यालयों को अनुदान देना राज्य सरकार की बाध्यता नहीं है। साथ कोर्ट ने एकल पीठ का आदेश रद्द कर दिया और संबंधित याचिकाएं खारिज कर दीं। 

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