रेलवे की दलील
रेलवे के अधिवक्ता ने दलील दी कि चूंकि शमीम का नियमितीकरण 2007 में हुआ जब नई पेंशन योजना लागू हो चुकी थी। ऐसे में वह पुरानी पेंशन के हकदार नहीं हैं।
कोर्ट ने कहा: सेवा अवधि को नहीं कर सकते नजरअंदाज
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मुंशी राम मामले का हवाला देते हुए रेलवे की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि नियमितीकरण से पहले की गई 50 प्रतिशत अस्थायी सेवा को पेंशन के लिए अर्हक सेवा माना जाना चाहिए। लिहाजा, अस्थायी दर्जे से लेकर नियमितीकरण तक की सौ फीसदी सेवा को भी पेंशन गणना में शामिल किया जाए।
विभिन्न जोन के कर्मियों के साथ नहीं अपना सकते अलग-अलग मापदंड
कोर्ट ने कहा कि रेलवे के विभिन्न जोन के कर्मचारियों के साथ अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते। जब अन्य जोन में कमीशन वेंडर्स को यह लाभ मिल रहा है तो याची को भी समानता के अधिकार के तहत लाभ मिलना चाहिए।