प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को इंटर कॉलेजों में सहायक अध्यापक सिलाई का परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने इस मामले में वैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि 1921 की नियमावली के परिशिष्ट क और ख के बीच ‘अथवा’ पढ़ा जाए। परिशिष्ट में लिपिकीय त्रुटि के कारण अथवा छूट गया है, जिससे अर्हता को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
जीतेंद्र चौहान की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने सहायक अध्यापक सिलाई के लिए आवेदन किया था। विज्ञापन में कहा गया कि 1921 की नियमावली के परिशिष्ट में दी गई योग्यता लागू होगी।
परिशिष्ट क में इंटरमीडिएट सिलाई विषय से और ख में हाईस्कूल तथा सिलाई में मान्यता प्राप्त संस्था से डिप्लोमा। याची दोनों अर्हताएं रखता था, मगर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद बोर्ड ने पूरा परिणाम यह कहकर रद्द कर दिया कि कोई योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला।
कोर्ट ने कहा कि दोनों अर्हताओं के बीच यदि अथवा शब्द जोड़ दिया जाए तो अर्हता रखने वाले अभ्यर्थी चयनित हो सकेंगे।