इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलटी ग्रेड पेपर लीक के गोपनीय दस्तावेज एसटीएफ द्वारा मांगने के खिलाफ लोक सेवा आयोग की याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने सरकार और आयोग की वकीलों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित करते हुए शीघ्र फैसला सुनाने के लिए कहा है।
आयोग की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ कर रही है। शुक्रवार को भी राज्य सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार पाल और अपर शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र ने बहस की। इनका कहना था कि बिना दस्तावेजों को देखे पेपर लीक के आरोपियों की भूमिका का पता नहीं लगाया जा सकता। जांच एजेंसी उन्हीं दस्तावेजों की जांच करेगी जो घपले से संबंधित हैं। आयोग जांच एजेंसी के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बहस की। उनका कहना था कि आयोग को अपने दस्तावेजों की गोपनीयता बचाए रखने का विशेष अधिकार प्राप्त है। जांच एजेंसी गोपनीय दस्तावेज नहीं मांग सकती। आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित करने संबंधी दस्तावेजों को किसी वरिष्ठ जांच अधिकारी को दिखाया जा सकता है। किन्तु आयोग ने साफ किया कि एसटीएफ ने जो दस्तावेज मांगे हैं वह बेहद गोपनीय हैं और नियमानुसार उनको किसी को नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद एसटीएफ इनको अपनी जांच में शामिल करना चाहती है। ऐसा करने से दस्तावेजों के सार्वजनिक होने का खतरा है। याचिका में एसटीएफ के नोटिस को रद्द करने और आयोग के किसी अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई है। सरकार का कहना था कि जांच में पेपर लीक की तह तक जाने की कोशिश में अपेक्षित दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया है। बिना दस्तावेजों को देखे घोटाले के दोषियों तक नहीं पहुंचा जा सकता। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।