इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवाकाल में शुरू हुई विभागीय कार्यवाही कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद तक लंबित रखने पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने मुरादाबाद नगर आयुक्त को 15 दिन में जांच पूरी करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि यदि इस अवधि में अनुशासनात्मक कार्रवाई पर निर्णय नहीं लिया गया, तो माना जाएगा कि सरकार की इस जांच में कोई रुचि नहीं है। लिहाजा, याची के पक्ष में उसके कानूनी परिणाम स्वतः लागू होंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने दिया।
दरअसल, मामला मुरादाबाद नगर निगम के पूर्व कर अधिकारी आर.डी. पोरवाल से जुड़ा है। इनके खिलाफ सेवाकाल में अनुशासनात्मक जांच शुरू हुई थी। जांच रिपोर्ट नाै मई 2023 को मिल गई थी और उसके बाद 11 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। याची ने आठ अगस्त को जवाब भी दे दिया लेकिन करीब दो साल बाद भी न विभाग ने कोई निर्णय लिया और न ही पेंशन, ग्रेच्युटी जैसी देय राशि का भुगतान किया। उल्टा, 31 जुलाई 2024 को रिटायर होने के बाद सरकार ने 22 नवम्बर 2024 को अनुच्छेद 351-A के तहत जांच जारी रखने की अनुमति दे दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।