शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।
- फोटो : अमर उजाला।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि एक देश की अवधारणा न केवल एक राजनीतिक दल के शासन के लिए, अपितु पूरे देश में एक जैसी संस्कृति, सभ्यता, रोजगार के अवसर और नागरिकों में एकात्मबोध के विकास के लिए भी लाई गई थी। आदि शंकराचार्य ने जब देश की चार दिशाओं में चार पीठ बनाए और चार धामों का उद्धार कर दक्षिण का पुजारी उत्तर में और उत्तर का पुजारी दक्षिण में नियुक्त किया तो प्रयास यही था कि भारत अखंड और समरूप रहे।
बृहस्पतिवार को परम धर्म संसद में परम धर्म आदेश जारी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गो माता के लिए गो प्रतिष्ठा ध्वज स्थापना भारत यात्रा से पता चला कि गाय के बारे में पूरा देश समरूप नहीं है। भारत के दो औपचारिक नाम भी देश की समरूपता को बाधित कर रहे हैं। इसलिए परम धर्म देश द्वारा हम अपने देश को एक नाम भारत से ही पहचानने का आदेश जारी करते हैं। भारत राजनैतिक रूप से भी अखंड हो, उसके भी प्रयास हो। मौनी अमावस्या के दौरान हुए हादसे पर मृतकों के लिए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। संचालन देवेंद्र पांडेय और विषय स्थापना राजा सक्षम सिंह योगी ने किया।