अफसरों ने बताया कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को समर्पित यह गैलरी सशस्त्र क्रांति से जुड़े उस समय के दस्तावेजों, हथियारों, वस्त्रों के अनूठे संग्रह के रूप में एक डिजिटल अनुभव देगी। यह देश की पहली ऐसी गैलरी होगी, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन की हर क्रांति को लाइट और साउंड के माध्यम दिखाया जाएगा। इसमें हर क्रांतिकारी की कहानियां भी आडियो, वीडियो के जरिए बयां होंगी। इस गैलरी में 1857 की तोप और प्रथम विश्व युद्ध की मशीन गन आकर्षण का केंद्र बनेगी। इस गैलरी में हर क्रांति को प्रोजेक्टर के माध्यम से लाइव दिखाया जाएगा।
संस्कृति मंत्रालय ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत इस इंटरेक्टिव गैलरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराने का प्रस्ताव किया है। राज्यपाल के निरीक्षण के बाद सेंट्रल हाल के आधुनिकीकरण के कामों को जल्द पूरा कराने के लिए कहा गया है। ताकि, पीएम के हाथों उद्घाटन करवाकर फरवरी में इस गैलरी को खोला जा सके। इससे पहले आजाद की जयंती पर 23 जुलाई को इस गैलरी का पीएम के हाथों लोकार्पण कराने की तैयारी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
दिव्यांग बच्चों से मिलीं, पांच औषधीय पौधे रोपे
इलाहाबाद संग्रहालय में अफसरों ने फल की टोकरी, अंगवस्तत्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर राज्यपाल का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने आजादी के दीवाने शीर्षक से आयोजित तीन दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ किया। साथ ही अहना वेलफेयर सोसाइटी के दिव्यांग बच्चों से मिलीं। उन बच्चों को को उन्होंने स्कूली बैग, अध्ययन सामग्री, फल का वितरण भी किया। इसके बाद उन्होंने पांच औषधीय पौधों बेल, पलाश, कचनार, अमलतास और आंवला का रोपण किया। इस मौके पर डीएम संजय कुमार खत्री, संग्रहालय निदेशक राजेश प्रसाद, संग्रहालय समिति के सदस्य प्रो. योगेश्वर तिवारी सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।
स्वराज भवन में गांधी-नेहरू की निशानियों से रूबरू हुईं आनंदी बेन पटेल
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय जंग-ए-आजादी का केंद्र रहे आनंद भवन -स्वराज भवन में महात्मा गांधी और पं. जवाहर लाल नेहरू की निशानियों को करीब से देखा। वह मोती लाल नेहरू के ड्राइंग रूम के अलावा स्वरूप रानी नेहरू के कक्ष में भी गईं। करीब सौ साल पुराने इस ऐतिहासिक भवन के वास्तुशिल्प की उन्होंने सराहना की। राज्यपाल की कार करीब 4:25 बजे स्वराज भवन के रास्ते से भीतर दाखिल हुई। वहां आनंद भवन संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मुहम्मद खालिद अंसारी ने उनकी अगवानी की। सबसे पहले राज्यपाल स्वराज भवन में भूतल पर स्थित मोती लाल नेहरू के ड्राइंग रूम को देखा। इसके बाद वह प्रथम तल पर पहुंचीं।