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गिनती के डॉक्टर, भगवान भरोसे नवजात

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Count's doctor, God trust newborn - फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के इलाज की व्यवस्था तो है, लेकिन डॉक्टर गंभीर नहीं हैं। यहां के आधुनिक सिक न्यू बॉर्न यूनिट(एसएनसीयू) में नवजात का इलाज कराना एवरेस्ट फतह करने से कम नहीं हैं। चार बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है, लेकिन ओपीडी के बाद डॉक्टर नहीं मिलेंगे। एसएनसीयू में भर्ती नवजात नर्सों के भरोसे रहते हैं।
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डफरिन अस्पताल में 12 बेड का नया एसएनसीयू स्थापित है। नया भवन, नई मशीनें और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का लाभ प्रसूताओं और नवजात को नहीं मिल पा रहा है। मंगलवार की दोपहर 2.30 बजे से शाम छह बजे तक चिकित्सक की ड्यूटी थी, लेकिन वह एसएनसीयू में नहीं थे। डफरिन में चार बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। तीन की तीन पालियों में एसएनसीयू की ड्यूटी और चौथे डॉक्टर ओपीडी करते हैं। रात में यहां बाल रोग विशेषज्ञ मिलते ही नहीं, तभी रात में यहां प्रसव कराने से भी परहेज किया जाता है।
एसएनसीयू के सामने वार्ड में पांच महिलाएं थीं, दो बेड खाली थे। महिलाएं कहां से आईं, उन्होंने प्रसव कहां कराया। कितने बच्चे भर्ती हैं, महीने में कितने नवजात इलाज के लिए भर्ती किए जाते हैं, यह सब बताने वाला कोई नहीं था। डॉक्टर का कक्ष खाली थी। काफी अनुरोध के बाद एक नर्स ने बताया कि जो भी जानकारी चाहिए अधीक्षक से लीजिए।
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काम न करना पड़े इसलिए नवजात को करते हैं रेफर
डफरिन अस्पताल में व्यवस्थाएं तो उच्चकोटि की हैं, लेकिन प्रबंधन बेहद लचर। आरोप हैं प्रसव कराने आईं महिलाओं से वसूली की जाती है। किसी तरह प्रसव करा लिया और बच्चा बीमार हुआ तो दौड़ चिल्ड्रेन तक लगाने की गारंटी हो जाती है। आम शिकायत है कि काम न करना पड़े, इसलिए डॉक्टर महिलाओं को एसआरएन बच्चों को गंभीर बताकर बिना देखे चिल्ड्रेन अस्पताल रेफर कर देते हैं, जबकि अस्पताल परिसर में गर्भवती महिलाओं की ही नहीं नवजात बच्चों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। जब तक बच्चों को हार्ट या न्यूरो की समस्या नह हो उन्हें यहीं रखा जा सकता है।
ठंड से बचाव के नहीं हैं उपाय
डफरिन के एसएनसीयू में नवजात के इलाज की व्यवस्था है, लेकिन उन्हें जन्म देने वाली प्रसूताओं को ठंड से बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। वार्ड में भर्ती महिलाएं एक कंबल के सहारे सिकुड़कर ठिठुरती रहती हैं। मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही दिखा, महिलाएं नाम बुलाए जाने पर एसएनसीयू जाती लौटने में ठंड से कांप जातीं।
अधीक्षक का नाम, मैट्रेन का नंबर
डफरिन के एसएनसीयू के बाहर किसी भी तरह की शिकायत के लिए एसआईसी (अधीक्षक) से मुलाकात करने की सूचना अंकित है। लोग परेेशान तब होते हैं, जब वहां लिखे नंबर पर फोन करने पर मैट्रेन जवाब देती हैं। उनका कहना होता है कि अधीक्षक से बात करें। कार्यवाहक अधीक्षक लोगों से मिलना तो दूर विभागीय अफसरों का फोन भी नहीं उठातीं। योजनाओं में लापरवाही और कई शिकायतों पर जिलाधिकारी डफरिन की अधीक्षिका वेतन रोकने की कार्रवाई कर चुके हैं।
डफरिन अस्पताल में पदों के हिसाब से बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने और उनसे कहां काम लेना हैं, यह वहां के एसआईसी तय करते हैं। डॉक्टरों की जरूरत होगी तो उसे पूरा कराया जाएगा। नवजात बच्चों के इलाज में कोताही की जांच कराएंगे।- मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी
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