नगर निगम रोजाना करीब पांच हजार लीटर डीजल तथा हजारों रुपये की दवा फूंक रहा है, लेकिन मच्छरों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। इन पर नियंत्रण तो दूर उल्टा इनका प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। नगर निगम के पास फॉगिंग करने वालीं 16 बड़ी मशीनें हैं। इनमें 199 लीटर डीजल और एक लीटर डेल्टा माइथ्रिन मिलाकर फॉगिंग कराई जाती है। अफसरों का दावा है कि सभी 16 मशीनों से रोजाना फॉगिंग कराई जा रही है। इसके अलावा 135 साइकिलें भी हैं। इन पर पांच लीटर की क्षमता वाले टैंक में डीजल तथा दवा को मिलाकर फॉगिंग कराई जाती है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक सिंह का कहना है कि जरूरत के अनुसार साइकिलों से रोजाना दो से तीन बार फॉगिंग कराई जा रही है। खास यह कि यह प्रक्रिया लंबे समय से लगातार जारी है। डेंगू समेत मच्छर जनित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ने के बाद फॉगिंग पर विशेष जोर होने के साथ निगरानी भी बढ़ाने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, सच्चाई इससे कोसों दूर है। वीआईपी क्षेत्रों में ही फॉगिंग कराके खानापूर्ति कर ली जा रही है। इसका नतीजा है कि मच्छरों पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसके अलावा मुश्किल यह है कि फाॅगिंग वाले स्थान पर कुछ मिनट बाद ही पहले की तरह मच्छर मंडराने लगते हैं।
एंटी लार्वा के छिड़काव का दावा, पर नालियों में मच्छरों का कब्जा
एंटी लार्वा के छिड़काव के लिए भी निगम की ओर से 300 से अधिक टीमें लगाई गई हैं। 20 विहीकल माउंटेड मशीन तथा 282 बैट्री स्प्रे मशीन की मदद से एंटी लार्वा के छिड़काव का दावा किया जा रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि क्षेत्रवार चार्ट बनाकर इन मशीनों से रोजाना एंटी लार्वा का छिड़काव किया रहा है। खास यह कि नालियों और दीवारों के लिए अलग-अलग दवा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद नालियों में मच्छरों का कब्जा है। शहर की किसी भी नाली या कूड़े के ढेर वाले स्थान पर मच्छरों का झुंड दिख जाएगा।
सर्वे और नोटिस के बाद भी खाली प्लॉटों में बह रहा गंदा पानी
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित खाली प्लॉटों में आसपास के घरों का गंदा पानी बहने के साथ ही कूड़ा फेंकने का क्रम भी जारी है। इस तरह के एक हजार से अधिक स्थान चिह्नित हैं। नगर निगम की ओर से इसपर रोक लगाने के लिए नोटिस दिया गया था। इसके अलावा निगम की ओर से ऐसे स्थानों पर नियमित तौर पर एंटी लार्वा के छिड़काव के दावे किए जा रहे हैं लेकिन विकल्प के अभाव में खाली प्लॉटों में गंदगी का अंबार है और यहां एंटी लार्वा का छिड़काव भी नहीं होता है। झूंसी में लाल चौक के रोहित माथुर, त्रिवेणीपुरम के मयंक आदि का कहना है कि उनके घर से कुछ दूरी पर ही कूंड़ा डंप है, लेकिन लंबे समय से फॉगिंग तथा एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ है। उनका यह भी कहना था कि कुछ वीआईपी क्षेत्रों में ही फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता है।
ठंड में भी कम नहीं हुए मच्छर
आमतौर पर ठंड शुरू होने पर मच्छर कम होने की बात कही जाती है लेकिन इस वर्ष ठंड का भी मच्छरों पर कोई असर नहीं है। नवंबर का पहला पखवाड़ा बीत गया है लेकिन मच्छरों का प्रकोप कम होता नहीं दिख रहा है।
महीनों से नहीं बैठे बालकनी में
मच्छरों ने लोगों को अपनी छत और बालकनी से भी दूर कर दिया है। अध्यापक शेखर सरन, सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त एनसी श्रीवास्तव आदि का कहना है कि शाम को वह परिवार वालों के साथ बालकनी में बैठकर ही चाय पीते थे। गर्मियों में पहले पूरा परिवार छत पर सोता था लेकिन मच्छरों ने यह सुख भी उनसे छीन लिया। बालकनी और छत पर पहुंचते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है।