बंदीकरण प्रस्ताव पर अमल का संकेत यह है कि कोर के एसएजी ग्रुप के अफसरों को दूसरे जोन में शिफ्ट किए जाने की कार्रवाई शुरू की गई है। यहां तैनात रहे एसएजी ग्रुप के अफसर राजीव त्रेहान जो सीएमएम के पद पर हैं, उन्हें एनसीआर भेजा गया है। इसका पत्र चार मई को ही जारी हुआ है। बताते हैं कि इसी दिन रेलवे बोर्ड ने कोर के एक अन्य अफसर को पूर्व तटीय रेलवे (एनएफआर) में भेजा है। इससे कोर अफसरों में नाराजगी है, लेकिन कार्रवाई के डर से कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है। कोर के साथ ही लखनऊ स्थित आरडीएसओ से भी कई वरिष्ठ अफसरों का तबादला दूसरे रेलवे जोन में किया गया है।
कोर से छीना गया मॉडिफिकेशन का कार्य
कोर प्रयागराज से रेलवे बोर्ड द्वारा तमाम कार्य भी अब वापस लिए जा रहे हैं। बीते 10 अप्रैल को बोर्ड ने रेल विद्युतीकरण के मॉडिफिकेशन का कार्य कराने की जिम्मेदारी कोर को सौंपी थी, लेकिन 26 अप्रैल को यह कार्य दूसरे रेलवे जोन को सौंप दिया गया।
पिछले वित्तीय वर्ष में कोर ने 73 फीसदी रेलमार्ग का किया विद्युतीकरण
पिछले वित्तीय वर्ष में देश में कुल 6,565 किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण हुआ। इसमें 73 फीसदी यानी 4,767 किमी का विद्युतीकरण कोर प्रयागराज ने किया, जबकि अन्य जोनल रेलवे, आरवीएनएल, राइट्स, इरकॉन समेत 21 एजेंसियां सिर्फ 1,798 किमी का ही विद्युतीकरण कर सकीं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी कोर ने 68 फीसदी, 2019-20 में 60 और 2021-22 में कुल लक्ष्य का 67 फीसदी कार्य अकेले ही किया।
यूनियन शुरू से ही कहती आ रही है कि रेलवे धीरे-धीरे सभी संस्थानों को खत्म करने का कार्य कर रही है। कोर को बंद करने का प्रस्ताव भी इसी श्रृंखला में शामिल है। यूनियन इस निर्णय का विरोध करते हुए मांग करती है कि कोर को खत्म न किया जाए। - आरपी सिंह, महामंत्री, नार्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ
कोर कार्यालय प्रयागराज की शान है। जनता की सवारी भारतीय रेल को पूंजीपतियों के हाथों सौंपने पर आमादा वर्तमान सरकार कोर को बंद न करे। यूनियन इसका पुरजोर विरोध करती है। - मनोज पांडेय, महामंत्री ,नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन