इसके बाद डायरी में दर्ज रिकॉर्ड को वह गाजी को दे देते थे। उधर गाजी ने कबूल किया है कि उक्त रिकॉर्ड को वह अपने अन्य साथियों को देता था। जो पहले मोबाइल नंबर के जरिये लोगाें से संपर्क करते थे। फिर कुछ समय तक उनसे मेलजोल बढ़ाकर उन्हें धर्मांतरण के लिए बरगलाते थे।सूत्रों का कहना है कि इस डायरी में 100 से ज्यादा लोगों के नाम मिले हैं। इनमें से अब तक कितने लोगों से रैकेट के सदस्य संपर्क कर चुके हैं, यह विस्तृत जांच पड़ताल के बाद ही पता चलेगा। हालांकि पूछताछ के बाद इतना तय है कि यह रैकेट बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपने मकसद को अंजाम देने में लगा हुआ था।
किताबें लेने वालों की तस्वीर भी खींचते थे आरोपी
एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र ने बताया कि पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि मोनिश व समीर किताबें लेने वालों की तस्वीरें भी खींचते थे। इस संबंध में जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि गाजी ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था। वह यह तस्वीरें गाजी को भेजा करते थे। उधर, पूछताछ में गाजी ने बताया कि इन तस्वीरों को वह अपने ऊपर के लोगों को भेजा करता था। इसके बाद ही उसे उनकी ओर से रुपये भेजे जाते थे।
शहर के साथ ही दिल्ली में छपती थी किताबेंसरगना से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि किताबें शहर के साथ ही दिल्ली में छपवाई जाती थीं। खास बात यह है कि किताबें अनाधिकृत प्रिंटिंग प्रेस में छपवाई जाती थीं। यही वजह है कि जो 204 किताबें आरोपियों के कब्जे से बरामद हुई हैं, उनके मुद्रक या प्रकाशक के नाम नहीं हैं। पुलिस उन प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का भी पता लगा रही है। अफसरों का कहना है कि चिह्नित करने के बाद इस संबंध में उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
बिना पैसे लिए किताबें देता था गाजी
मोनिश व समीर ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि जो किताबें वह मेला क्षेत्र और धार्मिक स्थलों के आसपास बांटते थे, वह उन्हें फ्री में मिलती थीं। किताबें सरगना गाजी उपलब्ध कराता था और वह इसके लिए रुपये नहीं लेता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों अपने को निर्दोष बताते रहे और यह कहते रहे कि वह यह काम गाजी के कहने पर करते थे। मौका पाकर वह किताबें बेच भी देते थे और इससे मिलने वाले रुपये रख लेते थे।
खाते में मिले हैं लेनदेन के सबूत
पुलिस अफसरों ने यह भी बताया कि गाजी के खाते में अबूधाबी से रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई है। फिलहाल उसने बताया है कि वह इन रुपयों को प्रचार प्रसार में खर्च करता था। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल जो भी लेनदेन सामने आए हैं, वह छोटी रकम से ही संबंधित हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि रकम बड़ी होने पर गाजी के जांच एजेंसियों के रडार पर आने के डर से ही ऐसा किया जा रहा था।