पुलिस विभाग में करीब चार हजार हेड कांस्टेबलों को दरोगा के पद पर प्रोन्नत करने के लिए जारी सूची विवादों में घिर गई है। सूची में शामिल लोगों की वरिष्ठता को दरकिनार कर मनमाने तरीके से प्रोन्नति देने का आरोप है। इसमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जिनका नाम वरिष्ठता सूची में काफी ऊपर है। क्वालीफाइंग टेस्ट में भी वह सफल रहे मगर उनको प्रोन्नति नहीं दी गई। विभाग की ओर से इसका कोई कारण भी नहीं बताया गया। महकमे के फैसले से क्षुब्ध तमाम ऐसे हेडकांस्टेबलों ने प्रोन्नति सूची को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है।
पुलिस महकमे में हेड कांस्टेबल से सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नति के लिए 11 अगस्त 2016 को डीआईजी स्थापना द्वारा 3822 लोगों की वरिष्ठता सूची जारी की गई। प्रोन्नति के लिए फिजिकल टेस्ट में पास होना जरूरी था। 23 सितंबर 2016 को फिजिकल टेस्ट के लिए 2900 हेडकांस्टेबलों को बुलाया गया। पुरुषों के लिए क्वालीफाइंग वाक टेस्ट 35 मिनट में 3.2 किलोमीटर और महिलाओं के लिए 28 मिनट में 2.4 किलोमीटर था। 12 नवंबर 2016 को फाइल प्रमोशन लिस्ट जारी की गई जिसमें 2193 हेडकांस्टेबल दरोगा के पद पर प्रोन्नत कर दिए गए। इनको प्रशिक्षण पर भेज दिया गया।
असफल रह गए हेडकांस्टेबलों का कहना है कि फिजिकल टेस्ट में वह भी क्वालीफाई हुए थे, मगर उनको प्रोन्नति नहीं दी गई, जबकि वरिष्ठता सूची में उनसे काफी नीचे रहे हेडकांस्टेबलों को प्रोन्नति सूची में शामिल कर लिया गया है। मेरठ, आगरा, इलाहाबाद, मुजफ्फनगर, बनारस और गोरखपुर आदि जिलों से आए अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रोन्नति देने में पिक एंड चूज की पॉलिसी अपनाई गई है।
दाखिल होगी याचिका
हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि सब इंस्पेक्टर/इंस्पेक्टर सर्विस रूल्स 2015 में अनफिट करने का कोई तरीका या नियम नहीं दिया गया है। सब इंस्पेक्टर के पचास प्रतिशत पद प्रोन्नति से भरे जाते हैं, बाकी पचास प्रतिशत सीधी भर्ती द्वारा। भगवान स्वरूप और अन्य की ओर से इस मामले में याचिका दाखिल की जा रही है। इसमें मांग की गई है कि अनफिट करने की वजह बताई जाए तथा
सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर प्रोन्नति भी कोर्ट में
अधिवक्ता विजय गौतम ने बताया कि सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति के लिए जारी सूची में भी इसी प्रकार का विवाद है। प्रोन्नति देने में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। वरिष्ठता को दरकिनार कर प्रोन्नति देने का आरोप है। इस मामले में भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।