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इलाहाबाद विवि के शिक्षक के विवादित बोल : जातिगत आधार पर रहता है 25 से 50 प्रतिशत का अंतर

Wed, 15 Dec 2021 11:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

दो साल पुराने मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से मिले नोटिस पर डॉ. विक्रम ने कहा कि दलित होने के कारण उनको यह नोटिस दिया गया है। अगर एससी कमीशन ने विश्वविद्यालय से मामले में जवाब तलब किया है तो पहले इविवि उसका जवाब दे।
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prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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इविवि में जातिगत आधार पर नंबर देने के बयान से चर्चा में आए शिक्षक डॉ. विक्रम अब भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में एक जैसा प्रदर्शन करने बाद भी जातिगत आधार पर नंबर दिए जाते हैं। सवर्ण और बैकवर्ड छात्रों के बीच अंकों का यह अंतर 25 से 50 प्रतिशत का होता है, खासतौर पर इंटरव्यू में। उन्होंने कहा कि उनके पास आने वाले छात्रों ने यह जानकारी उनको दी है। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनके पास आने वाले छात्रों ने बताया कि उनको जातिगत आधार पर नंबर दिया जाता है।

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दो साल पुराने मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से मिले नोटिस पर डॉ. विक्रम ने कहा कि दलित होने के कारण उनको यह नोटिस दिया गया है। अगर एससी कमीशन ने विश्वविद्यालय से मामले में जवाब तलब किया है तो पहले इविवि उसका जवाब दे। हमको नोटिस देने का क्या तात्पर्य है। कहा कि कमीशन को जो लेटर भेजा गया है, उसको भी मांगा, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से उनको नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने इविवि को मेल भी किया।

डॉ. विक्रम का आरोप है कि उनको नहीं पता कि उनके ऊपर क्या-क्या आरोप लगे हैं। कहा कि कुलपति ने एनआरएस की मीटिंग में कहा था कि दिल्ली जाने पर उनसे पूछा जाता है कि विश्वविद्यालय में जातिवाद है। उनके पास कई ऐसे लेख हैं, जिसमें यह बात सामने आती है कि विश्वविद्यालय में जातिवाद है। कई सेमिनार का आयोजन उन्होंने किया है, जिसमें उनको इसका अहसास भी हुआ। डॉ. विक्रम ने कहा कि विश्वविद्यालय इस बात की जांच कराए कि जो उन्होंने कहा वह गलत है। अगर ऐसा होता है, तो कुलपति जो सजा देना चाहे, दे सकती हैं। 

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