उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पहले प्रयागराज में एक चुनावी सभा में शामिल होने आए योगी आदित्यनाथ ने प्रतियोगी छात्रों से वादा किया था कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों में हुई धांधली के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसकी सीबीआई जांच कराएंगे और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। जांच तो शुरू हो गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस मसले पर प्रतियोगियों ने सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ दिया है और चुनावी सभा में मुख्यमंत्री के बयान से संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर मांग की है कि प्रतियोगियों से किए गए वादे को पूरा करें।
सीबीआई की टीम आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही है, जिनका परिणाम अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच जारी किया गया था। इसके साथ ही अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा-2010 की जांच के लिए सीबीआई ने प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली थी। सीबीआई कुल 598 परीक्षाओं की जांच कर रही हैं, जिनके तहत लगभग 40 हजार अभ्यर्थियों का चयन किया गया। सीबीआई के पास अब तक दस हजार से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी हैं, जिनमें कई परीक्षाओं को लेकर धांधली के आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई जांच शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत चुका है और अब तक पीसीएस-2015 में गड़बड़ी को लेकर सिर्फ एक मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों को संदिग्ध माना गया है, लेकिन किसी भी दोषी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।
सीबीआई जांच की सुस्त गति से प्रतियोगी छात्रों में नाराजगी है और वे सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सीबीआई दोषियों को चिह्नित क्यों नहीं कर पा रही है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का यूपी विधानसभा की चुनावी सभा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है। समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद आयोग की परीक्षाओं की सीबीआई जांच तो शुरू करा दी गई, लेकिन तीन साल बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ऐसा लग रहा है कि सीबीआई ने जांच ही बंद कर दी है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यूपी चुनाव से पहले प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी यहां के छात्रों से ऐसे ही वादे कर गए थे। समिति की ओर से उनके बयानों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया जाएगा।