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High Court : हाईकोर्ट के जजों को अपशब्द कहने पर याची को अवमानना नोटिस, आपत्तिजनक शब्दों का किया था प्रयोग

Fri, 24 Nov 2023 12:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची ने जवाब में कहा कि अदालतों की कार्यशैली से प्रतीत होता है कि न्यायाधीश वर्तमान युग के धृतराष्ट्र हैं और लालू प्रसाद व रसीद मसूद जैसे प्रभावशाली लाेग उनके प्रिय पुत्र दुर्योधन। ये जेल में बंद होने के बावजूद इलाज के नाम पर लंबा समय अस्पताल में गुजारते हुए सोशल मीडिया का आनंद लेते हैं। गरीब लोग बिना इलाज के जेलों में दम तोड़ देते हैं और जज मूकदर्शक बने रहते हैं।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मौजूदा और पूर्व जजों पर असंसदीय टिप्पणियां करने पर सहारनपुर के एक याची के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। उसने जजों को धृतराष्ट्र बताते हुए लालू प्रसाद यादव व रशीद मसूद को इनका प्रिय पुत्र दुर्योधन-सा करार दिया था। जवाब में माफी मांगने के बजाय उसने फिर अपशब्दों का प्रयोग किया। कोर्ट ने स्पष्टीकरण के लिए एक महीने की मोहलत दी है।

न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ यह प्रकरण सुन रही है। सहारनपुर निवासी ईश कुमार वलेचा ने आवास विकास परिषद में भूमि आवंटन संबंधी याचिका वर्ष 2018 में दाखिल की थी। इस बीच, विपक्षी अधिवक्ता सुनील मिश्रा और हबीब अहमद ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ का ध्यान याचिका में जजों के खिलाफ की गईं टिप्पणियों की तरफ दिलाया।

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इसमें कहा गया था कि अदालतों की कार्यशैली से प्रतीत होता है कि न्यायाधीश वर्तमान युग के धृतराष्ट्र हैं और लालू प्रसाद व रसीद मसूद जैसे प्रभावशाली लाेग उनके प्रिय पुत्र दुर्योधन। ये जेल में बंद होने के बावजूद इलाज के नाम पर लंबा समय अस्पताल में गुजारते हुए सोशल मीडिया का आनंद लेते हैं। गरीब लोग बिना इलाज के जेलों में दम तोड़ देते हैं और जज मूकदर्शक बने रहते हैं।

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कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी कर उससे दो हफ्ते में जवाब मांगा। सालभर बाद दाखिल जवाब में याची ने माफी मांगने के बजाय मौजूदा व सेवानिवृत जजों पर विवेकाधीन शक्तियों के दुरुपयोग संबंधी अनर्गल आरोप लगाए। कहा, न्यायाधीश भी लोक सेवक हैं, लेकिन जनता के साथ गुुलामाें जैसा बर्ताव करते हैं। इनकी कलम परमाणु बम जैसे विस्फोटक हथियार में बदल चुकी है। याची की अपमानजनक टिप्पणी को कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में गैरकानूनी हस्तक्षेप मानते हुए मंगलवार को अवमानना के लिए आरोपित कर दिया।

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