किशोर न्याय बोर्ड के पीठासीन अधिकारी की शिकायत में कहा गया है कि कोर्ट कार्यवाही चल रही थी। जिलाधिकारी अदालत में आए। पीठासीन अधिकारी के उनके सम्मान में खड़ा न होने पर नाराजगी जताई। न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप किया। बिना अनुमति दस्तावेज देखे, वीडियो रिकॉर्डिंग की। कोर्ट कार्यवाही में अवरोध उत्पन्न किया। कहा गया कि जिलाधिकारी में कोर्ट का सम्मान नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या अवमानना केस बनता है। कोर्ट ने निबंधक कार्यालय को पीठासीन अधिकारी की शिकायत की प्रति नोटिस के साथ जिलाधिकारी को यथाशीघ्र भेजने तथा सभी पेपर अधीनस्थ अदालतों के अधिवक्ता सुधीर मेहरोत्रा को तीन हफ्ते में सौंपने का आदेश दिया है।