कांस्टेबल भर्ती 2015
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डीआईजी स्थापना रिकार्ड के साथ तलब
0 हाईकोर्ट ने मांगा रिक्त पदों का ब्यौरा, परिणाम जारी होने से पहले ही कैरी फारवर्ड कर दिए पद
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। सिविल पुलिस और पीएससी में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए 2015 में जारी विज्ञापन में कुछ पद रिक्त रह जाने के मामले में हाईकोर्ट ने डीआईजी स्थापना को तलब किया है। कोर्ट ने 2015 और 2018 की भर्ती का पूरा रिकार्ड तलब किया है। पूछा है कि कितने पद बिना भरे रह गए हैं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि जब 2018 की भर्ती का विज्ञापन 2015 की भर्ती का परिणाम जारी होने से पहले ही आ गया था तब 2015 की भर्ती में बचे पदों को किस प्रकार से 2018 की भर्ती में कैरी फारवर्ड किया गया। याचिका की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
अजय प्रकाश मिश्र और सैकड़ों अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं। याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, सीमांत सिंह और विभू राय आदि का कहना था कि 2015 की भर्ती में कई पद रिक्त रह गए हैं। कटऑफ मेरिट नीचे लाकर इन पदों को भरा जाए। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी थी। सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि सिविल पुलिस के 23200 पदों का विज्ञापन हुआ था, यह सभी पद भरे जा चुके हैं। इसी प्रकार से पीएसी के 5716 और महिला आरक्षी के 5800 पदों पर भर्ती हो चुकी है। कोई भी पद रिक्त नहीं है।
याचीगण के अधिवक्ता ने इसका जबरदस्त विरोध किया। कहा गया कि 2015 की नियमावली में इस बात का प्रावधान किया गया था कि यदि कोई पद रिक्त रह जाता है तो वह अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड किया जाएगा। जबकि, भर्ती बोर्ड खुद ही कह रहा है कि बचे पदों को भर दिया गया है। दूसरी ओर बोर्ड का यह भी कहा है कि रिक्त रह गए पदों को 2018 की भर्ती में कैरी फारवर्ड किया गया है। ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि 2015 की भर्ती का परिणाम 15 मई 2018 को जारी हुआ, जबकि 2018 की भर्ती का विज्ञापन जनवरी 2018 में ही जारी कर दिया गया था। वकीलों का कहना था कि भर्ती बोर्ड इस मामले में स्वयं भ्रमित है और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
याची के वकीलों का कहना था कि सिविल पुलिस और पीएसी के करीब 300 पद अब भी रिक्त हैं। इसी प्रकार से 2018 की भर्ती में भी काफी संख्या में पद रिक्त हैं। इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने 2015 और 2018 की भर्ती का पूरा रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही डीआईजी स्थापना को भी अगली सुनवाई पर स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।