-आदेश के बावजूद अधिक कटऑफ वालों को सत्यापन के लिए नहीं बुलाया
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती में कट आफ मार्क से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन व चिकित्सा जांच के लिए बुलाने के आदेश का पालन नहीं करने पर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने सरकारी वकील को इस मामले में दो मार्च तक मांगी गई। जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने गोरखपुर के अजय कुमार की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत मिश्र का कहना था कि पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में याची सफल हुआ। लेकिन, उसे दस्तावेज सत्यापित करने व चिकित्सा जांच के लिए नहीं बुलाया गया। कहा गया कि कोर्ट में मुकदमों के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। हाईकोर्ट ने अंकित कुमार केस में बोर्ड को कट ऑफ मार्क से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापित करने व चिकित्सा जांच कराने के लिए बुलाने का निर्देश दिया है। दो साल बीत जाने के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं किया गया है। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।
कांस्टेबल भर्ती 2018- अभ्यर्थियों की लंबाई नापने में पेच, पहुुंच रहे कोर्ट
-चेयरमैन पुलिस भर्ती बोर्ड से व्यक्तिगत हलफनामा तलब
प्रयागराज। पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की लंबाई नापने में पेच फंस गया है। भर्ती बोर्ड से तमाम ऐसे अभ्यर्थियों को कम लंबाई के आधार पर बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जो पूर्व कि भर्तियों में लंबाई के मानक को पूरा करते थे। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल हो रही हैं। सोमवार को ऐसी तमाम याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट नेे पुलिस भर्ती बोर्ड से व्यक्तिगत हलफनामा मांग लिया है।
कोर्ट ने उन्हें बताने के लिए कहा कि अभ्यर्थियों की लंबाई नापने के लिए क्या उपकरण प्रयोग किए गए, लंबाई की जांच के लिए क्या प्रक्र्रिया अपनाई गई और क्या अभ्यर्थियों की लंबाई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से नापी गई है। नीरज कुमार, सतीश यादव सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने दिया है। अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व की भर्तियों में इन्हीं अभ्यर्थियों की लंबाई मानक (168 सेंटीमीटर) के बराबर या उससे अधिक थी। वर्ष 2018 की भर्ती में मेडिकल बोर्ड की जांच में कमी पाई जा रही है।
अलग मेडिकल बोर्ड से जांच का आदेश
एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अमन कुमार और चार अन्य तथा योगेंद्र कुमार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए याची की लंबाई की जांच के लिए अलग मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने याचीगण को अपने संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी के यहां पांच हजार रुपये जमा करके सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड से जांच कराने का निर्देश दिया है। जिलों के एसएसपी को भी कहा है कि वह एएसपी स्तर का अधिकारी नियुक्त करें जो मेडिकल बोर्ड के साथ मौजूद रहे। सीएमओ की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के बाद यह तय होगा कि किस मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सही मानी जाएगी।
कान की जांच के लिए अलग बोर्ड का आदेश
प्रयागराज। कांस्टेबल भर्ती 2018 के अभ्यर्थी गौरव कुमार को कान की खराबी बताकर मेडिकल बोर्ड से बाहर कर देने के मामले में हाईकोर्ट ने नया मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सीएमओ मुजफ्फरनगर को निर्देश दिया कि तीन वरिष्ठ चिकित्सकों, जिसमें प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर के चिकित्सक शामिल हो का बोर्ड बनाकर याची की कान की जांच की जाए। कोर्ट ने एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी निर्देश दिया है कि वह एएसपी स्तर का एक अधिकारी नियुक्त करें जो जांच के दौरान मेडिकल बोर्ड के समक्ष मौजूद रहे।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 25 फरवरी तक अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। गौरव कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने याची के अधिवक्ता अनिल सिंह बिसेन को सुनकर दिया है। याची का कहना था कि 2018 की भर्ती में शामिल हुआ मेडिकल बोर्ड की जांच में उसके कान में खराबी पाई गई। याची ने अपने कान की अलग से जांच कराई और एक दूसरे में उसके कान में कोई खराबी नहीं पाई, इसलिए नहीं कहा जा सकता कि याचिका कान खराब है। कोर्ट ने तो विरोधाभासी रिपोर्ट देखते हुए नया मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई 25 फरवरी को होगी ।