सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार तालाब, पोखर, ऊसर, आबादी, ग्रामसभा आदि जमीनों को किसी के नाम नहीं किया जा सकता है। सीओ के आदेश के खिलाफ 2018 में एसओसी से शिकायत की गई। चार वर्ष बाद 23 जुलाई 2022 को तत्कालीन एसओसी पुष्कर श्रीवास्तव ने 1997 के सीओ के आदेश को रद कर दिया। उस जमीन को फिर से ऊसर में दर्ज कर दिया, लेकिन वहां से कब्जा खाली नहीं करवाया गया।
जमीन पर ग्रामीण काबिज हैं। पिछले दिनों इसकी शिकायत चकबंदी के प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद से की गई है। उन्होंने जांच के लिए कमिश्नर प्रयागराज को पत्र भेजा। कमिश्नर ने 18 अप्रैल को उप संचालक चकबंदी (डीसीसी) को जांच के लिए निर्देशित किया है।
सरकार के काम आ सकती है जमीन
सरकारी प्रोजेक्ट के लिए जिला प्रशासन के पास जमीन नहीं है। शहर में कई प्रोजेक्ट के लिए जिला प्रशासन ने सेना से जमीन ली, लेकिन इसके बदले में देने के लिए जमीन नहीं है। वहीं,27 वर्ष पहले चकबंदी अधिकारी ने सरकारी जमीन को ग्रामीणों के नाम कर दी थी। उसे अब तक खाली नहीं कराया गया। ग्रामीणों को करोड़ों की जमीन देने वाले अफसर पर कार्रवाई भी नहीं की गई है।
उमरिया बादल उर्फ गेंदा गांव की 239 बीघा जमीन वर्षों से विवादित है। उस जमीन पर ग्रामीण काबिज हैं। पूर्व का आदेश 2022 में रद कर दिया गया था। उस मामले में अब फिर से जांच के आदेश दिए गए हैं। - आलोक श्रीवास्तव, एसओसी, प्रयागराज