कछुओं को विदेश भेजने के लिए इन-इन रूटों का होता है इस्तेमाल
हेड ऑफ ट्रैफिक इंडिया के पूर्व प्रमुख डॉ.शेखर कुमार नीरज बताते हैं कि कछुए की सबसे ज्यादा तस्करी मध्य प्रदेश के चंबल से होती है। तस्कर यहां से कछुए को बांग्लादेश, थाइलैंड, मलेशिया, चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया आदि देशों में पहुंचाने के लिए अलग-अलग रूट अपनाते हैं। इनमें, जयपुर, बीकानेर, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, सोनभद्र आदि जिलों से होते हुए कोलकाता पहुंचते हैं। फिर यहां से विदेशों तक इनकी तस्करी की जाती है।
ज्यादातर इन प्रजातियों की तस्करी
रेड क्राउन रूफ्ड-इनकी गर्दन पर लाल निशान होता। विदेशों में इसकी मांग अधिक है। शुभ संकेत के लिए इसे लोग पालते हैं। इंडियन रूफ्ड-इनकी खोल के सबसे ऊपरी हिस्से पर एक कठोर छत होती है। इसे भी ज्यादातर लोग पालने के लिए मोटी कीमत देते हैं।
सॉफ्टशेल-ताजा पानी का नरम खोल वाला कछुआ होता है। इसकी देश विदेश मांग हमेशा रहती है। इसे कई लोग खाने में इस्तेमाल करते हैं। फ्लैपशेल-यह कछुआ अधिकतर तालाब में पाया जाता है। तस्कर इन कछुओं को अवैध तरीके से पकड़कर पश्चिम बंगाल में बेचने की कोशिश करते हैं।
कब-कब पकड़ी गई तस्करी
- सितंबर 2024 को प्लेटफॉर्म चार व पांच से दो तस्कर 10 कछुए के साथ पकड़े गए
- अक्तूबर 2024 को प्लेटफॉर्म दो से दो तस्कर 14 कछुए संग गिरफ्तार किए गए
- फरवरी 2024 को महिला समेत दो लोग 204 कछुओं संग गिरफ्तार किए गए