कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सीएम अखिलेश यादव मंगलवार को इलाहाबाद में रोड शो के जरिये गठबंधन की ताकत दिखा गए। संगम नगरी में सपा-कांग्रेस गठबंधन का ‘महाकुंभ’ नजर आया। सड़कें कार्यकर्ताओं से पटी रहीं तो दोनों युवा नेताओं की एक झलक पाने को लोग दौड़ते-भागते नजर आए। कहीं घर के छज्जे तो कहीं पेड़ों की डालियों पर बैठकर हाथ में मोबाइल लिए लोग राहुल और अखिलेश की फोटो खींचते दिखे। हालांकि जबर्दस्त भीड़ में दिग्गजों का काफिला बार-बार फंसा और प्रचार का समय खत्म हो जाने के कारण उन्हें रोड शो बीच में छोड़ना पड़ा।
रोड शो की शुरुआत दोपहर 2.25 बजे हुई। इससे पहले दोनों नेताओं ने बालसन चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। रोड शो के दौरान शुरुआत में राहुल गांधी, अखिलेश यादव के साथ बस की छत पर सांसद धर्मेंद्र यादव और शहर उत्तरी के प्रत्याशी अनुग्रह नारायण सिंह नजर आए। काफिला स्वराज भवन होते हुए कर्नलगंज, विश्वविद्यालय चौराहा, मनमोहन पार्क, ट्रैफिक पुलिस लाइन की ओर बढ़ा। काफिले के पीछे कई किलोमीटर की दूरी तक सिर्फ सपा-कांग्रेस के झंडे और कार्यकर्ता नजर आ रहे थे। भीड़ का आलम यह था कि भारी सुरक्षा के बीच इन नेताओं की बस का आगे बढ़ना मुश्किल हो गया था। दोपहर 3.39 बजे काफिले ने राजापुर में प्रवेश किया। तब तक यह साफ हो चुका था कि भीड़ की हालत यही रही तो रोड शो पूरा नहीं हो सकेगा।
बस में शहर दक्षिणी से गठबंधन के प्रत्याशी परवेज अहमद टंकी और शहर पश्चिमी से रिचा सिंह भी मौजूद थीं। उन्हें भी बस की छत पर बुला लिया गया।
काफिला सर्कुलर रोड, एजी ऑफिस, गवर्नमेंट प्रेस चौराहा, नगर निगम, नवाबयूसुफ रोड, पानी टंकी फ्लाईओवर होते हुए लीडर रोड पर पहुंचा। 4.45 बजे काफिला रेलवे स्टेशन के सिटी साइड पहुंचा और जिस जगह शहर दक्षिणी एवं शहर पश्चिमी की सीमा मिलती है, वहीं रुक गया। शाम पांच बजे तक चुनाव प्रचार भी खत्म होना था, सो दोनों नेता सिर्फ 12 मिनट बोले। तीन मिनट बचे थे। राहुल और अखिलेश ने कबूतर उड़ाकर शाम 4.59 बजे रोड शो समाप्त कर दिया। दोनों नेता आए तो अलग-अलग थे लेकिन गए साथ। अंत में दोनों बस से उतरे और एक गाड़ी में बैठकर चल दिए।
चुनाव प्रचार खत्म होने का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा था, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी। दोनों बार-बार घड़ी देख रहे थे ताकि आचार संहिता का उल्लंघन न हो और समय से पहले रोड शो खत्म कर दिया जाए। वहीं, मीरापुर गोल चौराहा स्थित समापन स्थल पर हजारों कार्यकर्ता दोनों नेताओं का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन समय की कमी के कारण रेलवे स्टेशन के सामने रोड शो समाप्त कर दिया गया।
रोड शो के दौरान कर्नलगंज, कटरा और राजापुर में भीड़ का आलम यह रहा कि सड़क पर पैर रखने की जगह नहीं बची। ऐसे में कार्यकर्ता आगे बढ़ने के लिए धक्कामुक्की करने लगे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता गलियों की ओर भागे और वहां भगदड़ जैसी स्थित उत्पन्न हो गई। दोनों नेताओं की एक झलक पाने के लिए कोई दीवार तो कोई पेड़ पर चढ़ा नजर आया। काफिला अंत में जब रेलवे स्टेशन के सामने पहुंचा वहां रास्ता पूरी तरह से जाम हो गया।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव का काफिला जहां से भी निकला, वहां युवाओं में दोनों की फोटो खींचने के लिए होड़ लगी रही। राजापुर में एक युवती घर के छज्जे पर खड़े होकर मोबाइल से दोनों नेताओं की फोटो खींचती नजर आई और काफिला जैसे ही नजदीक आया उसने मोबाइल की स्क्रीन अपनी तरफ की और पीछे बस की छत पर खड़े राहुल गांधी-अखिलेश यादव के साथ सेल्फी ली।
दोनों नेताओं का काफिला जैसे ही एजी ऑफिस चौराहे पर पहुंचा वहां कर्मचारियों का हुजूम उमड़ा पड़ा। एजी ऑफिस के साथ बड़ी संख्या में वकील, बोर्ड ऑफिस, शिक्षा निदेशालय, राजस्व परिषद समेत तमाम दफ्तरों के कर्मचारियों ने अखिलेश और राहुल का भव्य स्वागत किया। बेकाबू होती भीड़ को संभालने के लिए सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सपा और कांग्रेस गठबंधन का रोड शो कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। किसी जमाने में राम मनोहर लोहिया स्वराज भवन आए थे और मंगलवार को अखिलेश यादव स्वराज भवन के दरवाजे पर पहुंचे। बालसन चौराहे से रोड शो शुरू हुआ और स्वराज भवन के बाहर पहुंचा तो कुछ देर के लिए काफिला वहीं ठहर गया। सड़क कार्यकर्ताओं से पटी थी और स्वराज भवन की दीवार पर भी बैठने और खड़े होने की जगह नहीं बची थी। अखिलेश यादव ने हाथ उठाकर स्वराज भवन की दीवार पर बैठे कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।