शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास धूनी तपस्या करते कंप्यूटर बाबा।
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उन्होंने कहा कि यह धूनी हवन एवं तपस्या किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और संत सम्मान की रक्षा के लिए एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसके माध्यम से संत समाज ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि अधिकारियों को सद्बुद्धि प्राप्त हो तथा भविष्य में संतों एवं धर्मगुरुओं के प्रति ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह तपस्या राष्ट्र, गौ माता, सनातन धर्म एवं संत समाज की गरिमा की रक्षा के लिए समर्पित है।