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उम्र सीमा में कटौती हिन्दी बेल्ट के लिए झटका

Mon, 29 Aug 2016 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। सिविल सेवा भर्ती परीक्षा के लिए उम्र सीमा घटाकर 26 वर्ष किए जाने की संस्तुति को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है। इस संस्तुति के पक्ष में विशेषज्ञ भी नहीं है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह फैसला सभी के लिए समान अवसर की मंशा में बाधा है। इससे ग्रामीण तथा परंपरागत विषयों की पढ़ाई करने वाले प्रतियोगी फिर पीछे रह जाएंगे। इंजीनियरिंग तथा अंग्रेजी बैकग्राउंड के प्रतियोतगियों का दबदबा और बढ़ेगा।

संघ लोक सेवा आयोग के विशेषज्ञों के पैनल में शामिल इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर जटाशंकर का कहना है कि उम्र सीमा को 26 वर्ष किए जाने के फैसले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। परीक्षा के नए पैटर्न में इंजीनियरिंग और अंग्रेजी माध्यम के प्रतियोगियों का वर्चस्व बढ़ा है। यहां के प्रतियोगी नए प्रारूप को समझने में पीछे रह गए। इसका विरोध बढ़ने के बाद ही नई कमेठी गठित की गई लेकिन यदि 26 वर्ष की आयु सीमा का प्रावधान लागू किया गया तो यह खाई और बढ़ेगी। बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वालों के लिए सफलता के अवसर और बढ़ जाएंगे। यह न्यायसंगत नहीं है। सिविल सेवा कोच रनीश जैन का कहना है कि यह संस्तुति लागू होती है तो हिन्दी पट्टी को नुकसान होगा। यहां परंपरागत पढ़ाई का तरीका है। इसलिए सिविल सेवा में चयनित होने वाले यहां के ज्यादातर प्रतियोगियों की उम्र 25-26 साल से अधिक होती है। विगत चार वर्षों में यहां से सफल होने वाले प्रतियोगियों की संख्या बहुत कम रह गई है। यह संस्तुति लागू होती है तो एक-दो चयन भी नहीं हो पाएंगे। इसके लिए संसाधनाें की कमी और शिक्षा व्यवस्था भी प्रमुख कारण है। दक्षिण भारत और अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रणालि सिविल सेवा भर्ती परीक्षा के पैटर्न के अनुरूप है। इसलिए वहां के प्रतियोगी जल्दी सफलता पा जाते हैं। ऐसे में उम्र को 26 वर्ष की सीमा में बाधना न्यायसंगत नहीं होगा।
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आईआईटीयन का बढ़ेगा दबदबा
इलाहाबाद । सिविल सेवा भर्ती परीक्षा में एक समय इलाहाबाद के प्रतियोगियों का दबदबा होता था लेकिन सीसैट तथा मुख्य परीक्षा में नया पैर्टन लागू होने के बाद इंजीनियरिंग और अंग्रेजी बैकग्राउंड तथा दक्षिण भारत के प्रतियोगियाें का वर्चस्व कायम है। विगत चार वर्षों से यह सिलसिला लगातार जारी है। खास यह कि आंकड़ों पर गौर करें तो इंजीनियरिंग और दक्षिण भारत से चयनित होने वाले ज्यादातर प्रतियोगियों की उम्र 25 साल से कम है। इसके विपरीत हिन्दी पट्टी के ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या बहुत कम है। ज्यादातर चयनितों की उम्र 25 साल से अधिक है। अवसर बचाने के लिए 50 फीसदी से अधिक प्रतियोगी तो 25 साल की उम्र के बाद परीक्षा में शामिल ही होते हैं। ऐसे में 26 साल की उम्र सीमा की पाबंदी के बाद हिन्दी-अंग्रेजी तथा उत्तर-दक्षिण की यह खाई और बढ़ेगी।
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