लोक सेवा आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों के आंदोलन को समझने में पूरा तंत्र फेल दिखाई दिया। जिला और पुलिस प्रशासन को इतने बडे़ आंदोलन की उम्मीद नहीं थी तो छात्रों की रणनीति की भी भनक नहीं लगी। जबकि, एक दिन पहले अफसराें की छात्र नेताओं से वार्ता हुई थी। स्थिति यह रही कि फोर्स आंदोलनकारियों के पीछे-पीछे इधर से उधर भागती रही। यही का कारण रहा कि सुभाष चौराहे पर छात्रों के जमावड़ा से पहले ही पुलिस लाठीचार्ज कर उन्हें तितर-बितर कर दिया।
लगातार परीक्षाओं तथा अन्य कारणों को देखते हुए छात्रों की इतनी भीड़ की उम्मीद नहीं थी। हालांकि लोक सेवा आयोग तथा उधर जाने वाली हर सड़क छावनी में तब्दील रही लेकिन आवागमन बाद में रोका गया। इसके अलावा छात्रों की पल-पल बदलती रणनीति ने भी पुलिस को खूब छकाया। छात्र सुभाष चौराहे भी जा सकते हैं, प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं थी। यही वजह रही महात्मा गांधी मार्ग पर छात्रों से निपटने की कोई तैयारी नहीं थी। छात्रसंघ भवन पर छात्रों ने हिन्दू हॉस्टल से आयोग पहुंचने की योजना बनाई थी।
उन्होंने पुलिस के रोके जाने पर वहीं गिरफ्तारी की घोषणा की थी लेकिन मनमोहन पार्क पर रोके जाने पर वे मेयोहाल की तरफ घुम गए। इस पर वहां और फोर्स बुला ली गई लेकिन कुछ देर धरना देने के बाद वे फिर हिन्दू हॉस्टल की तरफ बढ़े। वहां आयोग जाने से रोका गया तो छात्र सीधे सिविल लाइंस की तरफ चल दिए। इसके बाद तो छात्र जुलूस बनाकर सुभाष चौराहे पहुंच गए। वहां कई छात्र सड़क पर लेट गए और चक्काजाम कर दिया। हालांकि यहीं पर पुलिस हरकत में आ गई और शांतिपूवर्क आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर उन्हें जुटने से पहले ही खदेड़ दिया।