इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी किसान या भूमिधर को यह शिकायत है कि उसकी निजी भूमिधरी भूमि पर सीवर लाइन बिछा दी गई है, तो पहले संबंधित भूमि का विधिवत सीमांकन कराया जाए। यदि सीमांकन में यह साबित हो जाता है कि सीवर लाइन वास्तव में भूमिधरी भूमि पर बिछाई गई है, तो संबंधित व्यक्ति को जिला स्तरीय समिति के माध्यम से पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने वाराणसी निवासी रामजी पटेल की याचिका पर दिया।
याचिका में रामजी पटेल ने आरोप लगाया था कि उनकी भूमिधरी भूमि पर सीवर पाइपलाइन बिछा दी गई है। वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट से पाइपलाइन हटाने का निर्देश देने की मांग की थी। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि याची को यह शिकायत है कि पाइपलाइन उसकी भूमि पर डाली गई है, तो वह सीमांकन करा सकता है।
कोर्ट ने याची को संबंधित उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष सीमांकन के लिए आवेदन करने की छूट दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवेदन मिलने पर एसडीएम सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर भूमि का सीमांकन और सीमा निर्धारण कराएं। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सीवर पाइपलाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। इसलिए यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखी जाएगी।