कानपुर निगर निवासी याची रणधीर कुमार पांडेय 1950 से किरायेदार है। मकान मालिक पुरुषोत्तम दास महेश्वरी व याची के बीच किरायेदारी का विवाद चल रहा था। इसे लेकर अपील दाखिल की गई थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर कोर्ट ने मामले को अपीलीय अदालत को वापस भेज दिया था। अपीलीय अदालत ने अपील फिर से खारिज कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों और दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर अनर्गल आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल करने वाले कानपुर नगर के 77 वर्षीय वृद्ध पर एक लाख का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने चेताया कि उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अवमानना की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वृद्ध को हर्जाने की रकम 15 दिन में महानिबंधक के कार्यालय में जमा करनी होगी। यह आदेश देते हुए न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने रणधीर कुमार पांडेय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
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कानपुर निगर निवासी याची रणधीर कुमार पांडेय 1950 से किरायेदार है। मकान मालिक पुरुषोत्तम दास महेश्वरी व याची के बीच किरायेदारी का विवाद चल रहा था। इसे लेकर अपील दाखिल की गई थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर कोर्ट ने मामले को अपीलीय अदालत को वापस भेज दिया था। अपीलीय अदालत ने अपील फिर से खारिज कर दी।
याची ने दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। बहस के दौरान याची के वरिष्ठ वकील व कनिष्ठ वकील की ओर से मेरिट पर बहस नहीं की गई। विवादित स्थल एक साल में खाली करने का समय मांगे जाने पर कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी। इसके बाद याची ने पुनर्विचार अर्जी दाखिल कर अपने वकीलों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। कहा कि वकील की ओर से मकान खाली करने का बयान उनके कहने पर नहीं दिया गया है। कोर्ट को बताया गया कि अपील पर भी न्यायिक अधिकारियों पर याची ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत को बदनाम करने का प्रयास किया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए अवमानना कार्रवाई नहीं कर रहे, लेकिन एक लाख का हर्जाना लगाया है।