कंपनियों ने ब्रांडिंग के लिए खास तौर से नाव, यूनिपोल, होर्डिंग्स, लग्जरी टेंट, वॉच टावरों, बैरिकेड्स एवं पुलिस बूथ का इस्तेमाल किया। यात्री विश्राम स्थल का भी सहारा लिया गया। हालांकि, कंपनियों को इसके लिए करीब 25 लाख रुपये खर्च करने पड़े।
महाकुंभ नगर में विज्ञापन का अधिकांश काम संभाल रही हैदराबाद की एजेंसी के अफसरों का कहना है कि ब्रांड प्रमोशन पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुछ दूसरी कंपनियां भी यहां काम रही हैं।
भंडारे से लेकर श्रद्धालुओं को निशुल्क सवारी तक
महाकुंभ के दौरान अंबानी-अदाणी समूह भी पूरी ताकत से डटा रहा। देश के सबसे बड़े व्यावसायिक समूह में शुमार दोनों समूह ने एक माह तक धर्मार्थ सेवा की। अदाणी समूह ने इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट सेवा के जरिए श्रद्धालुओं को निशुल्क सवारी की सुविधा समेत भंडारा एवं निशुल्क धार्मिक पुस्तिका वितरित करके अपने को स्थापित किया। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्री ने सहयोगी संगठन की मदद से विशाल भंडारे के जरिये श्रद्धालुओं तक पहुंच बनाई। इसके अलावा अन्य संगठनों ने भी सीएसआर फंड कई कार्यों में खर्च किए।