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आरक्षण पर तीन साल तक आयोग ने नहीं दिया जवाब

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Commission on reservation did not respond for three years
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को वर्ष 2013 में त्रिस्तरीय आरक्षण के भारी विरोध के कारण अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था लेकिन, अभ्यर्थियों का एक गुट हमेशा आरोप लगाता रहा कि आयोग अप्रत्यक्ष रूप से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को इसका लाभ दे रहा है। इसी के मद्देनजर वर्ष 2016 में प्रतियोगी छात्रों की ओर से आयोग में जनसूचना अधिकार के तहत आवेदन देकर आरक्षण के मसले पर जानकारी मांगी गई थी लेकिन, तीन साल बाद भी आयोग ने जवाब नहीं दिया और मामला अब राज्य सूचना आयोग में लंबित है।
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आयोग ने पिछले दिनों बैठक कर जब निर्णय लिया कि अब किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ देने वाले अभ्यर्थी की अनारक्षित वर्ग में ओवरलैपिंग नहीं कराई जाएगी, तो फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा गया। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि जब आयोग किसी भी स्तर यानी प्री, मेंस, इंटरव्यू और स्क्रीनिंग परीक्षा में आरक्षण की बात कर रहा है तो इसका मतलब है कि वह अब तक हर स्तर पर आरक्षण का लाभ दे रहा था, जबकि 2013 में आयोग ने ही त्रिस्तरीय आरक्षण का प्रस्ताव वापस लिया था।
अवनीश के मुताबिक इसी आशंका के चलते उन्होंने वर्ष 2016 में आयोग में जनसूचना अधिकार के तहत तीन अलग-अलग आवेदन दिए थे। जिनके माध्यम से पूछा गया था कि पीसीएस प्री एवं मेंस में सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण किए जाने का क्या मापदंड है? यह भी पूछा था कि पीसीएस-2015 में सफल छात्रों की श्रेणीवार सूची उपलब्ध कराएं। वहीं, एक आवेदन के माध्यम से उस निर्णय, शासनादेश या प्रस्ताव की प्रति मांगी थी, जिसके तहत प्री और मेंस में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण किया जाता है।
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अवनीश का कहना है कि आयोग ने निर्णय, शासनादेश या प्रस्ताव की प्रति देने के बजाय परीक्षा के विज्ञापन की प्रति दे दी। वहीं, अन्य दोनों आवेदनों पर भी आयोग ने आरक्षण पर कोई जवाब नहीं दिया। तीनों ही मामलों में अविनीश ने यूपीपीएससी के खिलाफ राज्य सूचना आयोग में अपील की है और वहां इन मामलों की सुनवाई चल रही है।
अयोग के निर्णय के खिलाफ धरना आज
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के निर्णय के खिलाफ सपा के वरिष्ठ नेता एवं विधान परिषद सदस्य बासुदेव यादव के नेतृत्व में प्रतियोगी छात्र 10 फरवरी सुबह 11 बजे आयोग के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ लेने वालों को अनारक्षित वर्ग में ओवरलैप न कराए जाने के आयोग के निर्णय का विरोध करने वालों का आरोप है कि जाति के आधार पर ओबीसी, एससी, एसटी एवं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मेधावियों को परीक्षा में चयन से वंचित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। धरना-प्रदर्शन के साथ ज्ञापन देकर इस निर्णय को रद्द किए जाने की मांग की जाएगी।
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