पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा में मंगलवार को गलत पेपर बांटे जाने के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की दो सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ है। यह कमेटी जांच करेगी कि लापरवाही कहां हुई। इसके साथ आयोग ने मामले में एफआईआर दर्ज करा दी है। साथ ही जिस केंद्र में गलत पेपर बंटा है, वहां के केंद्र व्यवस्थापक को हटाने के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया है।
आयोग की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं का पेपर सीधे प्रिंटिंग प्रेस से सील होकर जिला कोषागार भेजा जाता है। कोषागार में वहां के कर्मचारियों और आयोगकर्मियों की देखरेख में पेपर डबल लॉक में रखवाया जाता है। इसके बाद परीक्षा वाले दिन आयोगकर्मी मजिस्ट्रेट की देखरेख में पेपर केंद्र तक पहुंचाते हैं। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी जांच के लिए आयोग ने सचिव जगदीश और उपसचिव वित्त मोइनउद्दीन की दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। आयोग के सचिव जगदीश मानकर चल रहे हैं कि गलती किसी भी स्तर पर हो सकती है। ऐसे में मामले की जांच के दौरान आयोगकर्मियों की भूमिका भी देखी जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह गंभीर लापरवाही है। मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
सचिव के अनुसार अब तक यही बात सामने आई है कि द्वितीय पाली में होने वाली निबंध की परीक्षा के पेपरों का बंडल जिस बोरे में रखा था, उस बोरे पर प्रथम पाली की पर्ची चस्पा थी। इसी असमंजस में बोरा कोषागार के डबल लॉक से निकालकर जीआईसी परीक्षा केंद्र तक पहुंचा दिया गया। हालांक्रि बोरे के अंदर पेपरों का जो बंडल था, उसके कवर पेज पर स्पष्ट-स्पष्ट लिखा था कि पेपर निबंध का है और दूसरी पाली में होना है। बंडल सुबह नौ बजे के आसपास खोल दिया गया, लेकिन केंद्र व्यवस्थापक और अन्य लोगों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में डीएम को प्रस्ताव भेजा जाएगा कि अगली परीक्षा में किसी दूसरे केंद्र व्यवस्थापक को तैनात किया जाए।