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Prayagraj News: कोचिंग लापता... अब दिखाओ कार्रवाई करके

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अग्निशमन विभाग की ओर से चलाए जा रहे फायर ऑडिट अभियान के बीच जिले के कई कोचिंग संस्थानों की गतिविधियां संदेह के घेरे में आ गई हैं। जांच शुरू होते ही कई कोचिंग संस्थानों ने 15 से 20 दिनों के लिए छुट्टी कर दी है। संस्थान के बाहर लगे बोर्ड और होर्डिंग हटा दिए हैं। इससे पता नहीं चल पा रहा कि यहां कभी कोई कोचिंग चलती भी थी।
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लखनऊ हादसे के बाद अग्निशमन विभाग मंगलवार से कोचिंग संस्थानों की जांच कर रहा है। बुधवार को भी जांच टीम तेलियरगंज, शिवकुटी, सलोरी, कीडगंज, झूंसी, फाफामऊ, नैनी, हंडिया समेत आसपास के क्षेत्रों में पहुंचीं। पता चला कि कई कोचिंग संस्थानों के रातों-रात पहचान बताने वाले होर्डिंग और सूचना पट उतार दिए हैं। कई संस्थानों के भवन तो मौजूद मिले, लेकिन बाहर से कोचिंग संचालन का संकेत नहीं था।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि संस्थानों की इस गतिविधि से उनकी पहचान और फायर ऑडिट करने में दिक्कत आ रही है। इनमें से ज्यादातर कोचिंग बेसमेंट में संचालित हो रही थीं। सभी अग्निशमन अधिकारियों को ऐसे संस्थानों की सूची तैयार कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। इनमें से ज्यादातर कोचिंग बेसमेंट में संचालित हो रही थीं। आसपास के लोगों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों ने 15-20 दिनों के लिए अवकाश घोषित कर दिया है।
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कोचिंग पर निर्भर रहते हैं प्रतियोगी छात्र
शहर में हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं। बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर आवासीय और व्यावसायिक भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई संस्थानों में पहले भी आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जांच के दौरान बोर्ड हटना और अचानक छुट्टी करना सवाल खड़े कर रहा है।
दो दिन में दस्तावेज प्रस्तुत करेगा नेक्स्ट आईएएस
नेक्स्ट आईएएस के प्रयागराज के निदेशक सुधांशु मिश्रा का कहना है कि संस्थान सभी मानक पूरे कर रहा है। मौके पर सिर्फ एक दस्तावेज नहीं दिखाया जा सका। दो दिन में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
पहले भी चले अभियान, नतीजे नहीं आए सामने
बीते माह दिल्ली अग्निकांड के बाद भी प्रयागराज में सघन जांच अभियान चलाया गया था। उस दौरान कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन समय बीतने के साथ अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई। अब फिर से शुरू हुई जांच के बीच यह सवाल उठ रहा है कि पहले मिले नोटिसों और निर्देशों का कितना पालन हुआ?
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